17 साल की माया राजेश्वरन ने तोड़ा सानिया मिर्जा का रिकॉर्ड, एक ही टूर्नामेंट में जीते दो खिताबBy IANS Mon, 12 October 2026 05:11 PM

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भारतीय जूनियर टेनिस खिलाड़ी माया राजेश्वरन रेवती ने अंतरराष्ट्रीय टेनिस में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिंगल्स और डबल्स, दोनों का खिताब अपने नाम कर लिया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

17 साल और तीन महीने की उम्र में माया डब्ल्यू35 स्तर पर महिला सिंगल्स का खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। उन्होंने इस मामले में भारत की दिग्गज टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया, जिन्होंने 17 साल और 10 महीने की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी।

माया ने डब्ल्यू35 लागोस टूर्नामेंट में सिंगल्स का खिताब जीतने के लिए अपने चारों पूरे मुकाबलों में एक भी सेट नहीं गंवाया। इसके बाद यूक्रेन की येलिजावेता कोटलीयर के साथ जोड़ी बनाकर उन्होंने महिला डबल्स का खिताब भी अपने नाम किया। दोनों ने चीन की मिन लियू और इटली की कार्लोटा मोचिया को वापसी करते हुए हराया।

फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर माया को बधाई देते हुए लिखा कि 17 साल की उम्र में डब्ल्यू35 स्तर पर सिंगल्स का खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय महिला बनने के साथ डबल्स का खिताब हासिल करना असाधारण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह सफलता माया की प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और भारतीय टेनिस में उनकी बढ़ती पहचान को दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि यह उपलब्धि उनकी भविष्य की कई और जीतों की शुरुआत साबित होगी।

सानिया मिर्जा का रिकॉर्ड तोड़ने के सवाल पर माया ने आईएएनएस के साथ वर्चुअल बातचीत में विनम्रता से कहा कि सानिया जैसी दिग्गज खिलाड़ी को वास्तव में पीछे छोड़ने की बात नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि सानिया हमेशा एक महान खिलाड़ी रहेंगी और वह खुद भी उनसे बहुत कुछ सीखने की कोशिश करती हैं।

माया ने कहा कि जब वह बड़ी हो रही थीं, तब सानिया उनकी आदर्श थीं। देश में टेनिस को पहचान दिलाने और लोगों के बीच इस खेल की लोकप्रियता बढ़ाने में सानिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि सानिया से उनकी ज्यादा बातचीत नहीं हुई है, लेकिन वह उनके इंटरव्यू और पॉडकास्ट सुनती रहती हैं। माया ने कहा कि सानिया हमेशा उनकी आदर्श रहेंगी और उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में उन्हें इस दिग्गज खिलाड़ी से सीखने का अवसर मिलेगा।

माया की यह उपलब्धि भारतीय महिला टेनिस के लिए भी अहम है। इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिंगल्स और डबल्स दोनों खिताब जीतना उनकी प्रतिस्पर्धी क्षमता को दर्शाता है। अब उनके सामने इस प्रदर्शन को आगे बढ़ाते हुए विश्व रैंकिंग में सुधार करने और उच्च स्तर के टूर्नामेंटों में लगातार बेहतर परिणाम हासिल करने की चुनौती होगी।