अमेरिकी टेक दिग्गज भारत के डेटा हब में अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं: रिपोर्टBy Admin Sun, 28 December 2025 06:17 AM









वॉशिंगटन- अमेरिका की प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियां भारत में दसियों अरब डॉलर का निवेश कर रही हैं, क्योंकि भारत डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक अहम वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में शनिवार को यह जानकारी दी गई।

रिपोर्ट के अनुसार माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, गूगल और मेटा के नेतृत्व में हो रहे ये निवेश भारत के डिजिटल परिदृश्य को तेजी से बदल रहे हैं और डेटा स्टोरेज व कंप्यूटिंग पावर की वैश्विक मांग के पैमाने को दर्शाते हैं।

माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में एआई परियोजनाओं के लिए 17.5 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जबकि अमेजन ने अगले पांच वर्षों में देशभर में एआई आधारित पहलों पर 35 अरब डॉलर निवेश करने की योजना घोषित की है।

गूगल ने अडानी ग्रुप और भारती एयरटेल जैसे भारतीय औद्योगिक समूहों के साथ साझेदारी के जरिए डेटा सेंटरों के लिए 15 अरब डॉलर निवेश का वादा किया है। मेटा भी गूगल की प्रस्तावित साइटों के पास एक बड़ी सुविधा विकसित कर रहा है, इसके अलावा अन्य भारतीय औद्योगिक समूह भी इस क्षेत्र में परियोजनाएं शुरू कर रहे हैं।

कुल मिलाकर इन निवेश प्रतिबद्धताओं की राशि कम से कम 67.5 अरब डॉलर तक पहुंचती है, जो भारत में किसी एक क्षेत्र में होने वाले सबसे बड़े निवेश अभियानों में से एक मानी जा रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, मुंबई स्थित एएसके वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य निवेश अधिकारी सोमनाथ मुखर्जी ने कहा, “यह भारत में अब तक के सबसे बड़े एकल-क्षेत्रीय निवेशों में से एक होने जा रहा है।”

कंपनियां भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और विशाल उपभोक्ता आधार पर दांव लगा रही हैं। भारत दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत डेटा की खपत करता है, लेकिन वैश्विक डेटा स्टोरेज क्षमता में उसकी हिस्सेदारी बहुत कम है। मुखर्जी ने कहा, “भारत दुनिया में डेटा का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, लेकिन इसके पास अमेरिका की डेटा क्षमता का मुश्किल से पांच प्रतिशत ही है।”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह निवेश अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनावों के बावजूद हो रहा है, जिनमें इस साल की शुरुआत में घोषित ऊंचे अमेरिकी शुल्क भी शामिल हैं। हालांकि वार्ताकार समाधान तलाशने में लगे हैं, लेकिन एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश लगातार आगे बढ़ रहा है।

भारत सरकार भी विदेशी सर्वरों पर निर्भरता से बचने के लिए स्थानीय डेटा भंडारण से जुड़े नियमों पर विचार कर रही है। वर्ष 2018 से अधिकारी ऐसे कानूनों पर मंथन कर रहे हैं, जिनके तहत डिजिटल सेवाओं को देश के भीतर स्थित सर्वरों पर संचालित करना अनिवार्य हो सकता है। बैंकिंग और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पहले से ही इस तरह के नियमों के दायरे में हैं।

डेटा सेंटर देश के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में तेजी से फैल रहे हैं, खासकर तटीय इलाकों और हैदराबाद जैसे शहरों में, जहां नीतिगत प्रोत्साहन, बिजली की उपलब्धता और बेहतर जल आपूर्ति ने बड़े निवेश को आकर्षित किया है।

वैश्विक स्तर पर एआई ने विशाल डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण की होड़ शुरू कर दी है, जिसमें खरबों डॉलर दांव पर लगे हैं। भारत के लिए यह निवेश डिजिटल अर्थव्यवस्था में अपनी मजबूत स्थिति सुनिश्चित करने का एक संगठित प्रयास है, हालांकि जमीन, बिजली और पानी से जुड़ी चुनौतियां दीर्घकालिक स्थिरता की बहस का अहम हिस्सा बनी रहेंगी।

 

With inputs from IANS

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