
नई दिल्ली - नासा के छह पहियों वाले पर्सिवियरेंस रोवर ने मंगल ग्रह पर पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) द्वारा नियोजित ड्राइव सफलतापूर्वक पूरी की है। नासा के अनुसार, यह प्रयोग 8 और 10 दिसंबर 2025 को किया गया, जिसमें जनरेटिव एआई की मदद से रोवर के लिए वे-पॉइंट्स (मार्ग बिंदु) तैयार किए गए।
आमतौर पर यह जटिल निर्णय लेने की प्रक्रिया नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी (जेपीएल), दक्षिणी कैलिफोर्निया में मौजूद मानव मिशन योजनाकारों द्वारा मैन्युअल रूप से की जाती है।
नासा के प्रशासक जारेड आइज़ैकमैन ने कहा, “यह प्रदर्शन दिखाता है कि हमारी क्षमताएं कितनी आगे बढ़ चुकी हैं और इससे यह भी स्पष्ट होता है कि हम अन्य ग्रहों की खोज किस तरह और बेहतर तरीके से कर सकते हैं। एआई जैसी स्वायत्त तकनीकें मिशनों को अधिक कुशल बनाती हैं, कठिन सतहों पर तेजी से प्रतिक्रिया करने में मदद करती हैं और पृथ्वी से दूरी बढ़ने पर वैज्ञानिक उपलब्धियों को भी बढ़ाती हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि यह वास्तविक अभियानों में नई तकनीक के जिम्मेदार और सावधानीपूर्वक उपयोग का सशक्त उदाहरण है।
कार के आकार के इस रोवर में सात वैज्ञानिक उपकरण लगे हैं और यह वर्ष 2021 से मंगल ग्रह की सतह पर उसके भूगोल और वायुमंडल का अध्ययन कर रहा है, साथ ही नमूने भी एकत्र कर रहा है।
इस प्रदर्शन के दौरान वैज्ञानिकों की टीम ने ‘विजन-लैंग्वेज मॉडल’ नामक जनरेटिव एआई तकनीक का उपयोग किया, जिसने मिशन से जुड़े मौजूदा डेटा और तस्वीरों का विश्लेषण किया। एआई ने वही चित्र और सूचनाएं इस्तेमाल कीं, जिन पर आमतौर पर मानव योजनाकार निर्भर करते हैं, ताकि रोवर के लिए सुरक्षित मार्ग निर्धारित किया जा सके।
यह पहल जेपीएल के रोवर ऑपरेशंस सेंटर (आरओसी) से संचालित की गई और इसमें एंथ्रॉपिक कंपनी के ‘क्लॉड’ एआई मॉडल का उपयोग किया गया। बिना मानव मार्ग योजनाकारों के हस्तक्षेप के, एआई ने मंगल की चुनौतीपूर्ण सतह पर रोवर के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार किया।
नासा के अनुसार, 8 दिसंबर को पर्सिवियरेंस ने एआई द्वारा तय किए गए वे-पॉइंट्स के आधार पर 689 फीट (210 मीटर) की दूरी तय की, जबकि दो दिन बाद उसने 807 फीट (246 मीटर) का सफर किया।
With inputs from IANS