
नई दिल्ली। इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग ने रविवार को केंद्रीय बजट 2026–27 की सराहना करते हुए कहा कि यह बजट संतुलित, स्थिर और समावेशी दृष्टिकोण अपनाता है, जिससे भारत के विनिर्माण और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को नीति निरंतरता, व्यापक पैमाने और लक्षित सुधारों के जरिए मजबूती मिलेगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर लगातार जोर, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 की शुरुआत और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के बड़े विस्तार से यह स्पष्ट होता है कि सरकार घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने और भारत की वैश्विक वैल्यू चेन में स्थिति सुदृढ़ करने के लिए दीर्घकालिक रूप से प्रतिबद्ध है। यह बात इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग संगठन ICEA ने कही।
ICEA ने भारत आधारित डेटा सेंटर्स के जरिए वैश्विक क्लाउड सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स हॉलिडे देने की घोषणा का भी स्वागत किया और इसे दूरदर्शी कदम बताते हुए कहा कि इससे दीर्घकालिक नीति स्थिरता सुनिश्चित होगी।
ICEA के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रो ने कहा, “बजट 2026–27 इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में विनिर्माण आधारित विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। ECMS का विस्तार, ISM 2.0 को समर्थन और क्लाउड व डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए दीर्घकालिक प्रोत्साहन रणनीतिक सोच और नीति स्थिरता का स्पष्ट संकेत हैं।” उन्होंने कहा कि मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में तेज वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि साहसिक और निरंतर नीतियां क्या हासिल कर सकती हैं।
IESA के अध्यक्ष अशोक चंदक ने कहा कि ISM 2.0 पर वित्त मंत्री का बयान भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं के लिए बेहद अहम संकेत है। “यह फैब-केंद्रित सोच से आगे बढ़कर पूरे वैल्यू चेन दृष्टिकोण की ओर इशारा करता है, जिसमें उपकरण, सामग्री, भारतीय आईपी और सप्लाई चेन मजबूती शामिल है। यदि भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में संरचनात्मक भूमिका निभानी है तो यह कदम बेहद जरूरी है,” उन्होंने कहा।
उद्योग ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये किए जाने का भी स्वागत किया। बजट में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को दिया गया समर्थन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY) के उद्योग के साथ लगातार सहयोग और व्यावहारिक प्रयासों का नतीजा बताया गया।
EEPC इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि बजट 2026–27 में बुनियादी ढांचे के विकास, सुधारों और स्थानीय विनिर्माण पर सरकार का फोकस जारी है, साथ ही MSME सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त कदम भी उठाए गए हैं। उन्होंने 10,000 करोड़ रुपये के SME ग्रोथ फंड, कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग स्कीम और समर्पित रेयर अर्थ कॉरिडोर की स्थापना को महत्वपूर्ण प्रस्ताव बताया।
GX ग्रुप के सीईओ पारितोष प्रजापति ने कहा कि ECMS का बजट 22,919 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करना इस बात का संकेत है कि सरकार अब इरादे से आगे बढ़कर क्रियान्वयन की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि फोकस अब केवल फाइनल प्रोडक्ट असेंबली तक सीमित न रहकर मजबूत कंपोनेंट इकोसिस्टम बनाने पर है, जो आज की बिखरी हुई वैश्विक सप्लाई चेन में बेहद अहम है। बढ़े हुए आवंटन से पीसीबी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, आरएफ और ऑप्टिकल सबसिस्टम, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग व टेस्टिंग, पैसिव कंपोनेंट्स, प्रिसिजन पार्ट्स और रेयर अर्थ से जुड़े रणनीतिक मटीरियल के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
With inputs from IANS