संशोधित एआई डीपफेक दिशानिर्देशों का विशेषज्ञों ने किया स्वागत, भ्रामक सामग्री पर रहेगा फोकसBy Admin Wed, 11 February 2026 11:55 AM

नई दिल्ली। कानूनी विशेषज्ञों ने एआई से तैयार डीपफेक सामग्री को लेकर सरकार द्वारा जारी संशोधित दिशानिर्देशों का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पहले प्रस्तावित स्पष्ट लेबलिंग की तुलना में अब ‘उचित प्रयास’ की अपेक्षा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए अधिक व्यावहारिक है।

आईटी मंत्रालय ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए अद्यतन दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सभी एआई से तैयार सामग्री को स्पष्ट रूप से लेबल करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे सिंथेटिक कंटेंट में एम्बेडेड पहचान चिह्न मौजूद हों।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में किए गए संशोधन से नियामक और सरकार को सिंथेटिक जनरेटेड इन्फॉर्मेशन (SGI) और डीपफेक सामग्री की निगरानी और नियंत्रण का अधिकार मिलेगा। एआई से तैयार या बदली गई सामग्री को दृश्य खुलासे या एम्बेडेड मेटाडाटा के जरिए चिन्हित करना अनिवार्य होगा, ताकि उपयोगकर्ता सामग्री को समझदारी से देख और उपयोग कर सकें।

जेएसए एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स के पार्टनर सजाई सिंह ने कहा कि संशोधित नियमों में पहले जारी मसौदे की तुलना में चिन्हित की जाने वाली सामग्री के दायरे को सीमित किया गया है। अब फोकस हर तरह की एआई से बनी सामग्री पर नहीं, बल्कि भ्रामक कंटेंट पर अधिक रखा गया है।

दूसरी ओर, सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि सरकार या अदालत द्वारा चिन्हित किए जाने के बाद एआई से बने डीपफेक कंटेंट को हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर तीन घंटे कर दी गई है।

सिंह के अनुसार, पहले प्रस्तावित अनिवार्य दृश्य लेबलिंग के बजाय ‘उचित प्रयास’ की अपेक्षा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए ज्यादा व्यावहारिक और स्वीकार्य होगी।

संशोधित नियमों के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगाए गए एआई लेबल या उससे जुड़े मेटाडाटा को हटाने या दबाने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, सोशल मीडिया कंपनियों को अवैध, यौन शोषण से जुड़ी या भ्रामक एआई जनित सामग्री की पहचान और प्रसार रोकने के लिए स्वचालित टूल्स लागू करने होंगे, जैसा कि MeitY के नवीनतम आदेश में कहा गया है।

 

With inputs from IANS