
नई दिल्ली। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने गुरुवार को सशस्त्र बलों के लिए कई अहम रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी। इनमें लड़ाकू विमान, मिसाइल, एंटी-टैंक माइंस और छह पी-8आई टोही विमान शामिल हैं।
छह पी-8आई विमान खरीदने की मंजूरी भारतीय नौसेना के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे नौसेना की समुद्री ताकत बढ़ेगी, समुद्री निगरानी क्षमता मजबूत होगी और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के रणनीतिक हितों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण सहयोग मिलेगा।
डीएसी की बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। बैठक में लगभग 3.60 लाख करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई, जिससे सशस्त्र बलों की युद्धक क्षमता और तैयारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
भारत का विशाल समुद्री क्षेत्र वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अनुमान के अनुसार, लगभग 70 से 80 प्रतिशत वैश्विक व्यापार इस क्षेत्र से होकर गुजरता है। समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना लगातार नए युद्धपोत और विमान अपने बेड़े में शामिल कर रही है।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि पी-8आई विमान की खरीद से नौसेना की लंबी दूरी की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता, समुद्री निगरानी और समुद्री हमले की ताकत में बड़ा सुधार होगा।
यह खरीद संयुक्त राज्य अमेरिका से की जाएगी। इन विमानों की खरीद से जुड़े समझौते की शर्तें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले वर्ष अमेरिका यात्रा के दौरान तय की गई थीं।
भारतीय नौसेना के पास पहले से ही 12 पी-8आई विमान मौजूद हैं। इनमें से आठ विमान वर्ष 2009 में खरीदे गए थे, जबकि दूसरे चरण में वर्ष 2016 में चार और विमान शामिल किए गए थे।
पी-8आई विमान की खासियत यह है कि यह समुद्र की गहराई में छिपी पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निशाना बनाने में सक्षम है। यह विमान लगभग 41,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है और एक बार में करीब 8,300 किलोमीटर तक उड़ान भरने की क्षमता रखता है।
इस विमान में कुल 11 हार्डप्वाइंट होते हैं, जिनमें पांच अंदर और छह पंखों पर लगे होते हैं। यह हार्पून एंटी-शिप मिसाइल, क्रूज मिसाइल, हल्के टॉरपीडो, पनडुब्बी रोधी हथियार और माइंस लॉन्च करने में सक्षम है। इसके अलावा इसमें अत्याधुनिक मल्टी-मिशन सरफेस सर्च रडार भी लगा हुआ है।
With inputs from IANS