जलवायु संकट से निपटने को खेती पर सरकार का बड़ा फोकस, मिट्टी की सेहत सुधारने पर दोगुना जोरBy Admin Sat, 09 May 2026 01:23 PM

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने जलवायु परिवर्तन के असर से कृषि को सुरक्षित बनाने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में बड़े स्तर पर काम तेज किया है। सरकार की ओर से जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के मुताबिक, National Mission for Sustainable Agriculture के तहत वर्ष 2014-15 से अब तक वर्षा आधारित खेती के विकास के लिए 2,119.84 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इससे 8.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया और करीब 14.35 लाख किसानों को फायदा मिला।

सरकार की Per Drop More Crop योजना के तहत 2015-16 से अब तक लगभग 109 लाख हेक्टेयर भूमि को कवर किया गया है। इसके लिए केंद्र की ओर से 26,325 करोड़ रुपये की सहायता दी गई।

मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए चल रही Soil Health Card Scheme के तहत 2025-26 में 97.53 लाख मिट्टी के नमूने एकत्र किए गए, जिनमें से 92.87 लाख की जांच पूरी हो चुकी है। वहीं 2015 से अब तक 25.79 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किए गए हैं।

सरकार का कहना है कि इन कार्डों के जरिए किसानों को फसल के हिसाब से पोषक तत्वों की सही जानकारी मिलती है, जिससे उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल संभव हो पा रहा है और मिट्टी की सेहत में सुधार हो रहा है।

NITI Aayog द्वारा 2025 में किए गए मूल्यांकन में सामने आया कि इस योजना से यूरिया के अत्यधिक इस्तेमाल में कमी आई है और कृषि उत्पादकता बेहतर हुई है। सर्वे में शामिल 68.5 प्रतिशत किसानों ने मिट्टी की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होने की बात कही, जबकि 25.7 प्रतिशत किसानों ने मामूली सुधार महसूस किया।

फैक्टशीट के अनुसार, 2014 से 2025 के बीच राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली के तहत 2,996 जलवायु-अनुकूल फसल किस्में भी विकसित की गईं।

सरकार ने कहा कि इस मिशन का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के कारण खेती पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को कम करना और लंबे समय तक खाद्य एवं आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

बाद में 2018-19 से इस मिशन को Green Revolution-Krishonnati Yojana के तहत शामिल किया गया। वहीं 2022-23 से इसे Pradhan Mantri Rashtriya Krishi Vikas Yojana के दायरे में लाकर टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एकीकृत रणनीति अपनाई गई।

 

With inputs from IANS