
नई दिल्ली: भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। Defence Research and Development Organisation (DRDO) ने शनिवार को एक्टिवली कूल्ड फुल स्केल स्क्रैमजेट कंबस्टर का लंबी अवधि तक सफल परीक्षण किया।
Defence Research and Development Laboratory (DRDL) के अनुसार, हैदराबाद स्थित अत्याधुनिक स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट (SCPT) फैसिलिटी में यह परीक्षण 1,200 सेकेंड से अधिक समय तक सफलतापूर्वक किया गया। इससे पहले जनवरी में 700 सेकेंड से अधिक अवधि का परीक्षण सफल रहा था।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस कंबस्टर का डिजाइन और विकास DRDL ने किया है, जबकि इसके निर्माण में उद्योग साझेदारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने इस उपलब्धि के लिए DRDO, उद्योग साझेदारों और अकादमिक संस्थानों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकास कार्यक्रम के लिए मजबूत आधार साबित होगी।
वहीं, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO अध्यक्ष Samir V Kamat ने भी इस परीक्षण से जुड़ी टीमों की सराहना की।
आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह उपलब्धि अत्याधुनिक सुपरसोनिक एयर-ब्रीदिंग इंजन तकनीक की बदौलत हासिल हुई है, जिसमें स्वदेशी लिक्विड हाइड्रोकार्बन एंडोथर्मिक फ्यूल, हाई टेम्परेचर थर्मल बैरियर कोटिंग और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस का इस्तेमाल किया गया।
SCPT फैसिलिटी में हुए इन परीक्षणों ने एक्टिव कूल्ड स्क्रैमजेट कंबस्टर के डिजाइन और अत्याधुनिक टेस्टिंग सिस्टम की क्षमता को सफलतापूर्वक प्रमाणित किया है।
हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि सरकार ने रक्षा अनुसंधान को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है। उन्होंने बताया कि DRDO अब तक 2,200 तकनीकों को विभिन्न उद्योगों को ट्रांसफर कर चुका है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा उद्योग, स्टार्टअप्स और शिक्षण संस्थानों के लिए निर्धारित किया गया है, जिसमें अब तक 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का उपयोग किया जा चुका है।
With inputs from IANS