समुद्री जीवों की तस्करी रोकने के लिए वैज्ञानिकों ने मांगी नई रणनीति, मछुआरों की भागीदारी पर जोरBy Admin Thu, 14 May 2026 11:49 AM

कोच्चि। शार्क फिन, कोरल और अन्य संरक्षित समुद्री जीवों की बढ़ती अवैध तस्करी को लेकर देश के वैज्ञानिकों, संरक्षण विशेषज्ञों और प्रवर्तन एजेंसियों ने चिंता जताई है। उनका मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए केवल सख्त कार्रवाई नहीं, बल्कि विज्ञान, तकनीक और तटीय समुदायों की भागीदारी वाली समग्र रणनीति जरूरी है।

यह मुद्दा ICAR-Central Marine Fisheries Research Institute द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रमुखता से उठाया गया। इस कार्यशाला में देशभर से प्रवर्तन अधिकारी, समुद्री वैज्ञानिक, संरक्षण विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल हुए।

विशेषज्ञों ने कहा कि समुद्री जीवों की अवैध तस्करी करने वाले नेटवर्क अब पहले से ज्यादा संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम हो चुके हैं। ऐसे में निगरानी तंत्र को मजबूत करना, वैज्ञानिक पहचान तकनीकों का इस्तेमाल और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है।

कार्यशाला में प्रस्तुत अध्ययनों के अनुसार, भारत में 2010 से 2022 के बीच शार्क से जुड़े अवैध उत्पादों की 17 बड़ी जब्तियां हुईं। इनमें करीब 82 प्रतिशत हिस्सेदारी शार्क फिन की रही। इस दौरान 15.8 टन से ज्यादा शार्क उत्पाद जब्त किए गए, जिसमें तमिलनाडु को बड़ा हॉटस्पॉट बताया गया।

डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर Manu Sathyan ने कहा कि समुद्री जीवों की सही पहचान करना जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने वैज्ञानिक संस्थानों और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाने की जरूरत बताई।

सीएमएफआरआई के निदेशक Grinson George ने कहा कि अवैध समुद्री व्यापार को रोकने के लिए मजबूत कानूनों के साथ तकनीक आधारित निगरानी और वैज्ञानिक मॉनिटरिंग जरूरी है।

वहीं जैव विविधता विशेषज्ञ Dipankar Ghose ने कहा कि समुद्री वन्यजीव अपराध, जमीन पर होने वाले वन्यजीव अपराधों से अलग है, क्योंकि यह सीधे मछुआरा समुदाय की आजीविका से जुड़ा होता है।

सीएमएफआरआई की वैज्ञानिक Shoba Joe Kizhakudan ने भी कहा कि समुद्री संरक्षण को केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि मत्स्य पालन और रोजगार से जुड़ा विषय मानकर देखना होगा। उन्होंने मछुआरों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने पर जोर दिया।

कार्यशाला में फॉरेंसिक शार्क फिन पहचान, साइबर वन्यजीव अपराधों में डिजिटल साक्ष्य जुटाने और कोरल, कछुओं व समुद्री स्तनधारियों की निगरानी जैसी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों पर भी चर्चा हुई।

 

With inputs from IANS