भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल ट्रेन को मिली मंजूरी, जींद-सोनीपत रूट पर जल्द दौड़ेगीBy Admin Wed, 27 May 2026 05:02 PM

नई दिल्ली। हरित और टिकाऊ परिवहन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय रेलवे ने उत्तर रेलवे के जींद-सोनीपत सेक्शन पर 10 कोच वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेन चलाने को मंजूरी दे दी है। रेलवे मंत्रालय ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।

यह ट्रेन जल्द ही परिचालन शुरू करेगी और 1,200 किलोवाट क्षमता वाले हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम से संचालित होगी। इसकी अधिकतम रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

इस पहल के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जो स्वच्छ रेल परिवहन के लिए हाइड्रोजन तकनीक पर काम कर रहे हैं। जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे देश पहले से इस तकनीक का परीक्षण या उपयोग कर रहे हैं।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक में हाइड्रोजन के रासायनिक अभिक्रिया से बिजली पैदा होती है और इससे केवल जलवाष्प का उत्सर्जन होता है। यही वजह है कि इसे पारंपरिक जीवाश्म ईंधन आधारित प्रणालियों का स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल विकल्प माना जा रहा है।

हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड को इस परियोजना के पायलट रूट के रूप में चुना गया है। ट्रेन के लिए जींद में स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज और रिफ्यूलिंग सुविधा भी तैयार की गई है। पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) ने यहां संपीड़ित हाइड्रोजन गैस के भंडारण और वितरण की अनुमति दे दी है।

रिफ्यूलिंग के लिए हाइड्रोजन कंप्रेशन सिस्टम लगाया गया है और तकनीकी सहायता के साथ जरूरी स्पेयर पार्ट्स की व्यवस्था भी की गई है, ताकि ट्रेन का संचालन सुरक्षित और निर्बाध बना रहे। बैकअप के तौर पर अतिरिक्त कंप्रेसर यूनिट भी उपलब्ध कराई जाएगी।

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हाइड्रोजन लीकेज डिटेक्टर और फ्लेम डिटेक्टर जैसे कई आधुनिक सेंसर लगाए गए हैं। इनकी नियमित जांच और सफाई की जाएगी ताकि धूल जमने जैसी समस्याओं से बचा जा सके।

रेलवे ने बताया कि हाइड्रोजन ट्रेन और हाइड्रोजन प्लांट के संचालन एवं रखरखाव से जुड़े मैनुअल, जिन्हें आरडीएसओ की मंजूरी मिली है, भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। शकूरबस्ती में प्रस्तावित मेंटेनेंस सुविधा के लिए विशेष सुरक्षा प्रावधान, नियमित ऑडिट और मानक संचालन प्रक्रियाएं लागू की जाएंगी।

मंजूरी के तहत 24 घंटे निगरानी, प्रशिक्षित और प्रमाणित कर्मचारियों की तैनाती, नियमित निरीक्षण और रखरखाव जैसी व्यापक सुरक्षा व्यवस्थाएं भी अनिवार्य की गई हैं। शुरुआती चरण में तकनीकी विशेषज्ञ ट्रेन के साथ मौजूद रहेंगे ताकि संचालन सुचारु बना रहे।

रेल मंत्रालय के अनुसार यह परियोजना भारतीय रेलवे की नवाचार, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण अनुकूल परिवहन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। साथ ही यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा और नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को भी मजबूती देगी।

 

With inputs from IANS