अगले पांच साल और गर्म होंगे, टूट सकते हैं तापमान के नए रिकॉर्ड : WMO रिपोर्टBy Admin Thu, 28 May 2026 05:12 PM

जिनेवा : दुनिया आने वाले पांच वर्षों में लगातार बढ़ती गर्मी और नए तापमान रिकॉर्ड का सामना कर सकती है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने गुरुवार को जारी अपनी नई रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि 2026 से 2030 के बीच वैश्विक औसत तापमान रिकॉर्ड स्तर के करीब या उससे भी ऊपर बना रह सकता है। खासतौर पर आर्कटिक क्षेत्र में तापमान वृद्धि वैश्विक औसत से कई गुना अधिक रहने की आशंका जताई गई है।

यह निष्कर्ष WMO की रिपोर्ट ‘ग्लोबल एनुअल टू डेकाडल क्लाइमेट अपडेट 2026-2035’ में सामने आया है। ब्रिटेन के मौसम विभाग और WMO के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में 13 संस्थानों के पूर्वानुमानों को शामिल किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक 2026 से 2030 के बीच पृथ्वी का औसत तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले यानी 1850-1900 के औसत स्तर की तुलना में 1.3 से 1.9 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है। इसके साथ ही संभावना जताई गई है कि इस अवधि में कोई एक साल 2024 को पीछे छोड़ते हुए अब तक का सबसे गर्म वर्ष बन सकता है।

WMO ने कहा है कि 2026-2030 के दौरान औसत वैश्विक तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर सकता है, हालांकि किसी एक साल में तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने की संभावना फिलहाल कम है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आने वाले वर्षों में प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में एल नीनो जैसी परिस्थितियां बनने की संभावना है, खासकर 2027 और 2028 में। रिपोर्ट के मुख्य लेखक लियोन हरमनसन के अनुसार, 2026 के अंत तक एल नीनो की स्थिति बनने के संकेत हैं, जिससे 2027 के रिकॉर्ड गर्म वर्ष बनने की संभावना और बढ़ जाती है।

हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि किसी एक साल में 1.5 डिग्री या उससे अधिक तापमान बढ़ना यह नहीं दर्शाता कि पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्य पूरी तरह विफल हो गए हैं। इन लक्ष्यों का आकलन लंबे समय यानी करीब 20 वर्षों के औसत तापमान के आधार पर किया जाता है।

रिपोर्ट का एक और अहम निष्कर्ष आर्कटिक क्षेत्र को लेकर है। अनुमान है कि अगले पांच उत्तरी गोलार्ध के सर्दियों के मौसम (नवंबर से मार्च) में आर्कटिक का तापमान 1991-2020 के औसत से करीब 2.8 डिग्री सेल्सियस अधिक रहेगा। यह वैश्विक औसत तापमान वृद्धि की तुलना में साढ़े तीन गुना ज्यादा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता तापमान, एल नीनो की स्थिति और आर्कटिक में तेजी से हो रही गर्मी भविष्य में चरम मौसम घटनाओं, बर्फ पिघलने और समुद्र स्तर बढ़ने जैसी चुनौतियों को और गंभीर बना सकते हैं।

 

With inputs from IANS