सेमीकंडक्टर और एआई में नई ऊंचाइयों पर पहुंची भारत-अमेरिका साझेदारी, रणनीति से अब उद्योग स्तर पर क्रियान्वयन की ओर बढ़े कदमBy Admin Mon, 01 June 2026 02:27 PM

नई दिल्ली। सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में भारत और अमेरिका की साझेदारी अब केवल रणनीतिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि तेजी से औद्योगिक स्तर पर लागू होने के चरण में पहुंच गई है। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio की भारत यात्रा के बाद इस सहयोग को नई गति मिली है।

यह साझेदारी यूएस-इंडिया ट्रस्ट (TRUST) पहल और PAX Silica Declaration के तहत आगे बढ़ रही है। दोनों देश भरोसेमंद तकनीकी आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने, कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने और संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (R&D) परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं।

फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री Narendra Modi और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ‘ट्रांसफॉर्मिंग द रिलेशनशिप यूटिलाइजिंग स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजीज’ (TRUST) पहल के तहत एआई और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का विजन पेश किया था। इसका उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना और मानव कल्याण के लिए तकनीक का उपयोग सुनिश्चित करना है।

इस साझेदारी के तहत रक्षा और व्यावसायिक उपयोग के लिए सेमीकंडक्टर निर्माण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। उदाहरण के तौर पर, Shakti Semiconductor इलेक्ट्रिक वाहनों और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए कंपाउंड सेमीकंडक्टर विकसित कर रही है।

वहीं अमेरिकी कंपनियां General Atomics और Synopsys भारतीय कंपनी 3rdiTech के साथ मिलकर चिप डिजाइनों के सत्यापन और कुशल इंजीनियरिंग कार्यबल तैयार करने पर काम कर रही हैं।

भारत के PAX Silica Declaration से जुड़ने के बाद वह उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है, जो एआई, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित एवं भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के लिए सहयोग कर रहे हैं। इसका उद्देश्य किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है।

सूत्रों के अनुसार, भारत और अमेरिका एक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर रोडमैप भी तैयार कर रहे हैं, जिससे भारत में बड़े पैमाने पर अमेरिकी एआई अवसंरचना स्थापित करने में आने वाली वित्तीय, ऊर्जा और तकनीकी चुनौतियों का समाधान किया जा सके।

इस बीच, अमेरिकी तकनीकी दिग्गज Amazon, Microsoft और Google भारत में अपने क्लाउड नेटवर्क और डेटा सेंटर क्षमताओं के विस्तार के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं। भारत के तेजी से बढ़ते एआई बाजार को देखते हुए अमेरिका उसे चीन के बाहर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए एक अहम साझेदार के रूप में देख रहा है।

दोनों देशों की सरकारें साझा नियामकीय ढांचे और कंप्यूटिंग संसाधनों तक पारस्परिक पहुंच पर भी सहमत हैं। इससे स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा और सीमा-पार नवाचार को नई गति मिलेगी।

हाल ही में मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) और रेयर अर्थ तत्वों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। ये खनिज सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर पैनल और अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर चीन की इन महत्वपूर्ण संसाधनों पर मजबूत पकड़ को लेकर चिंता बढ़ रही है। रुबियो ने स्पष्ट कहा कि भारत और अमेरिका दोनों की साझा रणनीतिक रुचि है कि इन उद्योगों की बुनियादी सामग्रियां किसी एक स्रोत या एकाधिकार पर निर्भर न रहें।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी न केवल तकनीकी क्षेत्र में दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर और एआई आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका को भी और अधिक महत्वपूर्ण बनाएगी।

 

With inputs from IANS