एआई बदल रहा है विज्ञापन उद्योग की तस्वीर, भारत बन सकता है वैश्विक एडटेक हब: रिपोर्टBy Admin Tue, 02 June 2026 01:31 PM

नई दिल्ली: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) वैश्विक विज्ञापन उद्योग के हर स्तर को तेजी से बदल रही है और भारत को दुनिया के अग्रणी एडटेक (AdTech) केंद्र के रूप में उभरने का अवसर दे रही है। मंगलवार को जारी रेडसीर (Redseer) की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 27 लाख इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी छात्रों का नामांकन, 2 से 2.4 करोड़ गिटहब डेवलपर्स तथा करीब 1,900 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCCs) हैं, जो सालाना 65 से 75 अरब डॉलर का निर्यात करते हैं। यह मजबूत तकनीकी आधार एआई-आधारित उत्पाद विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक विज्ञापन बाजार का आकार 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो चुका है। ऐसे में एआई विज्ञापन उद्योग को अधिक स्वचालित, डेटा-आधारित और परिणाम-केंद्रित मॉडल की ओर तेजी से ले जा रहा है। इस बदलाव में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।

एआई अब विज्ञापन उद्योग के लगभग हर प्रमुख क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है। इसमें मीडिया खरीद (Media Buying), क्रिएटिव कंटेंट निर्माण, विज्ञापन प्रभाव का आकलन, ई-कॉमर्स और ग्राहकों को लक्षित करने की प्रक्रिया शामिल है।

रेडसीर का अनुमान है कि भारत का डिजिटल विज्ञापन बाजार 2025 में लगभग 21 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 33 से 42 अरब डॉलर के बीच पहुंच सकता है। इससे देश में एआई-आधारित विज्ञापन नवाचार को और बढ़ावा मिलेगा।

वर्तमान में वैश्विक विज्ञापन खर्च का लगभग 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा डिजिटल माध्यमों पर हो रहा है, जबकि 80 से 85 प्रतिशत डिजिटल विज्ञापन लेन-देन प्रोग्रामेटिक तकनीक के जरिए स्वतः संचालित हो रहे हैं।

रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स के एसोसिएट पार्टनर मुकेश कुमार ने कहा कि एआई केवल विज्ञापन उद्योग में एक नई तकनीक जोड़ने का काम नहीं कर रहा, बल्कि यह पूरे विज्ञापन तंत्र को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि एआई आधारित मशीन लर्निंग बिडिंग सिस्टम, आइडेंटिटी ग्राफ, ट्रांसफॉर्मर-आधारित रिकमेंडेशन इंजन और एजेंटिक एडवरटाइजिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए जिस तकनीकी क्षमता की जरूरत है, वह भारत ने पिछले तीन दशकों में विकसित कर ली है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय मूल की एडटेक कंपनियां अब केवल आउटसोर्सिंग सेवा प्रदाता नहीं रह गई हैं, बल्कि वे वैश्विक स्तर पर उत्पाद-आधारित कंपनियों के रूप में उभर रही हैं। इससे वे पारंपरिक सेवा-आधारित आय के बजाय सॉफ्टवेयर और प्लेटफॉर्म आधारित अधिक लाभकारी आय अर्जित कर रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे एआई का उपयोग बढ़ेगा, वैसे-वैसे मजबूत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, विज्ञापनदाताओं और प्रकाशकों के व्यापक नेटवर्क तथा उन्नत एआई क्षमताओं वाली कंपनियां वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और अधिक मजबूत स्थिति हासिल करेंगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत न केवल डिजिटल विज्ञापन तकनीकों का बड़ा उपभोक्ता बन रहा है, बल्कि एआई-संचालित अगली पीढ़ी के विज्ञापन समाधानों का प्रमुख निर्माता बनने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

 

With inputs from IANS