
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते उपयोग के बीच भारतीय कंपनियां कर्मचारियों के प्रशिक्षण और साइबर सुरक्षा जागरूकता को लेकर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही हैं। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, लगभग आधी भारतीय कंपनियों को डर है कि पर्याप्त प्रशिक्षण के बिना AI में निवेश करना उनके लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।
वैश्विक जोखिम और बीमा सलाहकार कंपनी Marsh की रिपोर्ट में कहा गया है कि 49 प्रतिशत भारतीय संगठनों को चिंता है कि वे कर्मचारियों को आवश्यक कौशल दिए बिना AI तकनीकों को अपना रहे हैं, जबकि 52 प्रतिशत ने साइबर खतरों के प्रति कमजोर जागरूकता को प्रमुख मानव संसाधन जोखिम बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कर्मचारियों से जुड़े जोखिमों में स्वास्थ्य और कर्मचारी लाभ (Benefits) की बढ़ती लागत सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है। करीब 65 प्रतिशत एचआर और जोखिम प्रबंधन पेशेवरों का मानना है कि अगले एक से दो वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं और कर्मचारी लाभों पर होने वाला खर्च और बढ़ेगा।
यह अध्ययन 26 देशों के 4,500 से अधिक एचआर और जोखिम विशेषज्ञों की राय पर आधारित है, जिनमें भारत के 311 प्रतिभागी शामिल थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तेज़ी से हो रहे तकनीकी बदलाव, आर्थिक दबाव और कुशल प्रतिभाओं की कमी ने कारोबारी जोखिमों का स्वरूप बदल दिया है। AI अपनाने की होड़ और योग्य कर्मचारियों की कमी के कारण कंपनियां लगातार अनिश्चितताओं का सामना कर रही हैं।
सर्वेक्षण में शामिल 96 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें अपने नियोक्ता पर भरोसा है कि वह उन्हें सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराएगा। वहीं, 54 प्रतिशत कर्मचारी अपनी मेडिकल कवरेज के लिए पूरी तरह नियोक्ता पर निर्भर हैं।
हालांकि, रिपोर्ट ने कर्मचारी लाभ योजनाओं को लेकर भी चिंता जताई है। 41 प्रतिशत उत्तरदाताओं का कहना है कि लाभ संबंधी फैसले लेते समय दीर्घकालिक लागत के प्रभावों पर पर्याप्त विचार नहीं किया जाता, जबकि 40 प्रतिशत का मानना है कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य और वित्तीय स्थिति पर पड़ने वाले असर को भी नजरअंदाज किया जाता है।
भारतीय एचआर पेशेवरों के लिए कुशल श्रमिकों की कमी (Labour Shortage) सबसे बड़ी चिंता के रूप में सामने आई है। यह जोखिम समग्र रूप से चौथे स्थान पर रहा।
रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि कमजोर नेतृत्व और पर्यवेक्षण क्षमता भारतीय संगठनों के लिए सबसे बड़ा जोखिम बढ़ाने वाला कारक बन रही है। करीब 62 प्रतिशत प्रतिभागियों का मानना है कि नेतृत्व कौशल की कमी का कंपनियों पर गंभीर या विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है।
इसके अलावा, पारदर्शिता, निष्पक्षता और समावेशन की कमी भी भारत के शीर्ष पांच जोखिमों में शामिल रही, जो वैश्विक रैंकिंग की तुलना में भारतीय कंपनियों के लिए अधिक महत्वपूर्ण चिंता के रूप में उभरी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भविष्य में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए भारतीय कंपनियों को AI कौशल विकास, साइबर सुरक्षा जागरूकता, नेतृत्व प्रशिक्षण और कर्मचारी कल्याण पर अधिक निवेश करने की आवश्यकता होगी।
WIth inputs from IANS