
नई दिल्ली। मध्य अफ्रीका में फैले इबोला वायरस के प्रकोप से निपटने के वैश्विक प्रयासों में भारत अहम भूमिका निभाने जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, Serum Institute of India (एसआईआई) इबोला के बुंडीबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन के खिलाफ वैक्सीन के विकास और उत्पादन की प्रक्रिया को तेज कर रहा है।
मॉडर्न डिप्लोमेसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह परियोजना University of Oxford और Coalition for Epidemic Preparedness Innovations (सीईपीआई) के सहयोग से चलाई जा रही है। इस पहल को World Health Organization (डब्ल्यूएचओ) और Africa Centres for Disease Control and Prevention का भी समर्थन प्राप्त है।
विकसित की जा रही वैक्सीन ChAdOx1 BDBV विशेष रूप से बुंडीबुग्यो इबोलावायरस से सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार की गई है। यह वही स्ट्रेन है, जो वर्तमान में Democratic Republic of the Congo और Uganda के कुछ हिस्सों में फैले प्रकोप से जुड़ा हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ज़ैरे (Zaire) स्ट्रेन के लिए जहां पहले से वैक्सीन उपलब्ध है, वहीं बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ अब तक कोई स्वीकृत वैक्सीन नहीं है। ऐसे में यह प्रयास वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह वैक्सीन उसी वायरल वेक्टर तकनीक पर आधारित है, जिसका उपयोग कोविड-19 के दौरान विकसित Oxford-AstraZeneca COVID-19 vaccine में किया गया था। इस तकनीक की मदद से वैक्सीन का बड़े पैमाने पर उत्पादन अपेक्षाकृत तेजी से किया जा सकता है।
डब्ल्यूएचओ ने इस वैक्सीन उम्मीदवार के मूल्यांकन की प्रक्रिया को भी तेज कर दिया है ताकि प्रकोप को नियंत्रित करने और संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिल सके।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत से अब तक कांगो और युगांडा में इबोला के 1,500 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जबकि 650 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक Tedros Adhanom Ghebreyesus ने हाल ही में कहा था कि बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी वैक्सीन मौजूदा महामारी को नियंत्रित करने के साथ-साथ भविष्य के प्रकोपों से निपटने की तैयारी को भी मजबूत करेगी।
वहीं, अफ्रीका सीडीसी के महानिदेशक Jean Kaseya ने पुष्टि की है कि इस वैक्सीन का निर्माण भारत का सीरम इंस्टीट्यूट करेगा।
फिलहाल भारत में इबोला का कोई सक्रिय मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, स्वास्थ्य एजेंसियों ने एहतियात के तौर पर प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की निगरानी बढ़ा दी है। हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग और आइसोलेशन संबंधी व्यवस्थाओं को भी सख्त किया गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इबोला का यह प्रकोप वैश्विक चिंता का विषय है और ऐसे समय में भारत की वैक्सीन निर्माण क्षमता दुनिया को इस चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान कर सकती है।
With inputs from IANS