एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को तेजी से अपना रहा भारत, इलाज और जांच समझने में GenAI का बढ़ा इस्तेमाल: रिपोर्टBy Admin Wed, 17 June 2026 05:31 PM







नई दिल्ली: भारत एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र के उन देशों में शामिल हो गया है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सबसे तेजी से अपनाया जा रहा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में भारतीय अब जनरेटिव एआई (GenAI) का इस्तेमाल बीमारी, इलाज और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी बेहतर ढंग से समझने के लिए कर रहे हैं।

बैन एंड कंपनी की बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 78 प्रतिशत उपभोक्ता अपनी बीमारी के निदान और उपचार के विकल्पों को समझने के लिए GenAI का उपयोग कर रहे हैं। वहीं, 73 प्रतिशत लोग डॉक्टर से मिलने से पहले तैयारी करने और 72 प्रतिशत लोग स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को समझने के लिए इस तकनीक का सहारा ले रहे हैं।

ADVERTISEMENT
Advertisement

रिपोर्ट में बताया गया है कि डिजिटल हेल्थ सेवाओं को अपनाने में सबसे बड़ी भूमिका जेनरेशन-ज़ेड (Gen Z) निभा रही है। इस वर्ग के 66 प्रतिशत युवा ऑनलाइन फार्मेसी का उपयोग कर रहे हैं और एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं व डिजिटल टूल्स के प्रति उनका रुझान अन्य आयु वर्गों की तुलना में अधिक है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मरीज अब अधिक सुविधाजनक और बेहतर समन्वित स्वास्थ्य सेवाओं की अपेक्षा कर रहे हैं। 88 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे स्वास्थ्य सेवाओं को पहले से अधिक आसान और सुविधाजनक बनते देखना चाहते हैं, जबकि 79 प्रतिशत चाहते हैं कि डॉक्टर फोन और मैसेज के जरिए भी आसानी से उपलब्ध रहें।

सर्वे में शामिल 93 प्रतिशत भारतीयों ने अपनी पूरी उपचार प्रक्रिया के दौरान एक ही समन्वय केंद्र (सिंगल पॉइंट ऑफ कोऑर्डिनेशन) की आवश्यकता जताई। हालांकि, स्वास्थ्य सेवाओं की लागत और उपलब्धता अब भी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। 43 प्रतिशत लोगों ने इलाज का महंगा होना, 42 प्रतिशत ने लंबा इंतजार और 30 प्रतिशत ने समय पर अपॉइंटमेंट नहीं मिलने को प्रमुख समस्या बताया।

ADVERTISEMENT
Advertisement

ADVERTISEMENT
Advertisement

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि स्वास्थ्य व्यवस्था में समन्वय की कमी मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है। 45 प्रतिशत से अधिक लोगों ने कहा कि उन्हें स्वास्थ्य प्रणाली को समझने और सही सेवा तक पहुंचने में कठिनाई होती है। वहीं, 62 प्रतिशत लोगों को सही बीमारी की पहचान या उचित इलाज के लिए एक से अधिक डॉक्टरों या अस्पतालों के पास जाना पड़ता है।

इसके बावजूद पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का भरोसा कायम है। 59 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे अपनी चिकित्सा यात्रा के समन्वय के लिए क्लीनिक को प्राथमिक केंद्र मानते हैं। वहीं, 85 प्रतिशत लोगों ने प्राथमिक चिकित्सकों और 75 प्रतिशत ने अस्पतालों पर सबसे अधिक भरोसा जताया।

रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में वैकल्पिक स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन भारत इस मामले में अभी क्षेत्रीय औसत से पीछे है। भारत में केवल 42 प्रतिशत लोग ऐसे विकल्पों का उपयोग करते हैं, जबकि एपीएसी का औसत 57 प्रतिशत है।

टेलीहेल्थ सेवाएं भी भारत में मुख्य रूप से सामान्य और गैर-गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन्हें अभी पारंपरिक इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक सेवा के रूप में देखा जा रहा है।
 

 

With inputs from IANS

ADVERTISEMENT
Advertisement