सरकार ने ईस्ट कोस्ट रेलवे के 631 किमी रेलमार्ग पर 'कवच' प्रणाली लगाने को दी ₹270 करोड़ की मंजूरीBy Admin Mon, 22 June 2026 04:17 PM







नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ईस्ट कोस्ट रेलवे के 631 रूट किलोमीटर (आरकेएम) रेलमार्ग पर स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली 'कवच' लगाने के लिए 270 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है। रेल मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी।

मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना के तहत ईस्ट कोस्ट रेलवे के छह महत्वपूर्ण रेलखंडों—बाघुआपाल-बुधापंक, हरिदासपुर-पारादीप, खुर्दा रोड-बलांगीर, नौपाड़ा-गुनुपुर, लांजीगढ़ रोड-जूनागढ़ और बोब्बिली-सलूर—पर कवच प्रणाली स्थापित की जाएगी।

यह परियोजना भारतीय रेलवे के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत पूरे रेल नेटवर्क पर एलटीई (LTE) आधारित संचार प्रणाली के साथ कवच तकनीक लागू की जा रही है।

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कवच भारत में विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली है, जिसे सिग्नल की अनदेखी (SPAD), निर्धारित गति से अधिक रफ्तार और ट्रेनों की टक्कर जैसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तैयार किया गया है।

यह प्रणाली ट्रेनों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखती है और आवश्यकता पड़ने पर स्वतः ब्रेक लगाकर दुर्घटनाओं की आशंका को काफी हद तक कम करती है।

रेल मंत्रालय ने बताया कि इन रेलखंडों पर कवच प्रणाली लागू होने से ट्रेनों को स्वचालित सुरक्षा और टक्कर-रोधी सुविधा मिलेगी, जिससे रेल संचालन और अधिक सुरक्षित होगा।

इसके अलावा, यह तकनीक घने कोहरे जैसी प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों में भी ट्रेनों के सुरक्षित संचालन में मदद करेगी और रेल सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ाएगी।

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रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना से ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में चलने वाली यात्री तथा मालगाड़ियों दोनों को लाभ मिलेगा। साथ ही, ट्रेनों की समयपालन क्षमता (पंक्चुअलिटी), परिचालन दक्षता और महत्वपूर्ण रेलमार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।

यह मंजूरी भारतीय रेलवे द्वारा सिग्नलिंग और सुरक्षा प्रणालियों के आधुनिकीकरण के व्यापक अभियान के तहत दी गई है।

गौरतलब है कि इसी महीने सरकार ने ईस्टर्न रेलवे के हाई डेंसिटी नेटवर्क (HDN) और हाईली यूटिलाइज्ड नेटवर्क (HUN) मार्गों पर स्थित 32 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) प्रणाली लगाने के लिए 405 करोड़ रुपये की परियोजना को भी मंजूरी दी थी। इस परियोजना का उद्देश्य महत्वपूर्ण रेल गलियारों में सुरक्षा, विश्वसनीयता और परिचालन क्षमता को और बेहतर बनाना है।

 

WIth inputs from IANS

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