




नई दिल्ली: भारत तेजी से एक ऐसे **सॉवरेन एआई (Sovereign AI)** इकोसिस्टम के रूप में उभर रहा है, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), नियामकीय ढांचा और देश का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, **96 प्रतिशत भारतीय नीति-निर्माता** देश में सॉवरेन एआई रणनीति को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
डेल टेक्नोलॉजीज की रिपोर्ट के मुताबिक, **97.7 प्रतिशत सरकारी अधिकारियों** ने एजेंटिक एआई (Agentic AI) को एआई अपनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया। इनमें से **44.4 प्रतिशत** का मानना है कि भविष्य में एजेंटिक एआई की भूमिका बेहद अहम होगी, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र के औसत **36.9 प्रतिशत** से काफी अधिक है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि **53.3 प्रतिशत** उत्तरदाताओं ने मजबूत नियामकीय और गवर्नेंस व्यवस्था के साथ एआई को अपनाने का समर्थन किया।

प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट से निवेश की ओर बढ़ रहा भारत
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सरकारी संस्थान अब केवल एआई के प्रयोगात्मक चरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर निवेश और व्यावहारिक उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि, इस महत्वाकांक्षी सॉवरेन एआई विजन को साकार करने के लिए दो प्रमुख चुनौतियों का समाधान आवश्यक होगा—**विशेषज्ञ एआई प्रतिभाओं की कमी** और **साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाना**।
करीब **92 प्रतिशत सरकारी अधिकारियों** ने कहा कि डिजिटल और एआई विशेषज्ञों की उपलब्धता सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। नेटवर्क मैनेजमेंट एवं इंटीग्रेशन, एआई ऑपरेशंस (AIOps) और सॉवरेन डेटा गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में कुशल पेशेवरों की सबसे अधिक आवश्यकता महसूस की जा रही है।
इसके अलावा, **36 प्रतिशत** उत्तरदाताओं ने साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और **34 प्रतिशत** ने विभिन्न देशों के नियामकीय ढांचों के अनुरूप काम करने को एआई के विस्तार में प्रमुख चुनौतियां बताया।


डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बना भारत की ताकत
**डेल टेक्नोलॉजीज इंडिया** के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक **मनीष गुप्ता** ने कहा कि भारत ने ऐसा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है, जो केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं बल्कि नवाचार का भी मजबूत मंच बन चुका है।
उन्होंने कहा कि **आधार, यूपीआई, ओएनडीसी और भाषिणी** जैसे प्लेटफॉर्म भारत की सॉवरेन एआई रणनीति की मजबूत नींव हैं। इन प्लेटफॉर्मों के जरिए डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता और भरोसे को डिजिटल व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है।
डेटा सुरक्षा से आगे बढ़कर रणनीतिक आवश्यकता
रिपोर्ट के मुताबिक, **73.3 प्रतिशत** सरकारी अधिकारियों का मानना है कि सॉवरेन एआई संवेदनशील राष्ट्रीय डेटा की सुरक्षा और स्थानीय कानूनों के अनुपालन के लिए बेहद जरूरी है।
वहीं **70 प्रतिशत** उत्तरदाताओं ने इसे केवल डेटा सुरक्षा तक सीमित न मानते हुए भू-राजनीतिक जोखिमों और वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं से निपटने के लिए भी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक निवेश बताया।
रिपोर्ट से स्पष्ट है कि भारत अब एआई के क्षेत्र में केवल तकनीकी विकास पर ही नहीं, बल्कि सुरक्षित, विश्वसनीय और आत्मनिर्भर डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
With inputs from IANS
