




नई दिल्ली: सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने भारतीय नौसेना के हाल ही में कमीशन किए गए तीन युद्धपोतों के निर्माण के लिए 5,700 टन विशेष रक्षा-ग्रेड स्टील की आपूर्ति की है। कंपनी ने बुधवार को इसकी जानकारी देते हुए इसे देश की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता के स्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर आयोजित समारोह में स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस दुनागिरी, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट आईएनएस अग्रय और सर्वे वेसल (लार्ज) आईएनएस संशोधक को भारतीय नौसेना में शामिल किया था।
SAIL के अनुसार, इन युद्धपोतों के लिए डीएमआर 249ए ग्रेड की विशेष गुणवत्ता वाली हॉट-रोल्ड स्टील शीट और प्लेट्स की आपूर्ति की गई, जिनका निर्माण कंपनी के बोकारो, भिलाई और राउरकेला इस्पात संयंत्रों में किया गया।

कंपनी ने कहा कि यह उपलब्धि रक्षा क्षेत्र के लिए अत्याधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाले विशेष स्टील के उत्पादन में उसकी तकनीकी क्षमता को दर्शाती है। रक्षा क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए SAIL विशेष रूप से राउरकेला स्टील प्लांट के स्पेशल प्लेट प्लांट में डीएमआर ग्रेड स्टील प्लेट्स का उत्पादन लगातार बढ़ा रही है।
कंपनी ने यह भी बताया कि उसके प्रयास केंद्र सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहल के अनुरूप हैं, जिनका उद्देश्य रणनीतिक क्षेत्रों में देश को आत्मनिर्भर बनाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।


इससे पहले भी SAIL स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत, प्रोजेक्ट-17ए के स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरि, आईएनएस हिमगिरि और आईएनएस उदयगिरि सहित कई महत्वपूर्ण नौसैनिक परियोजनाओं के लिए विशेष स्टील की आपूर्ति कर चुकी है। इसके अलावा आईएनएस अजय, आईएनएस निस्तार और आईएनएस अंजदीप जैसे कई अन्य नौसैनिक पोतों में भी कंपनी का रक्षा-ग्रेड स्टील इस्तेमाल किया गया है।
SAIL के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अशोक कुमार पांडा ने कहा कि कंपनी देश के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को मजबूती देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उच्च क्षमता वाली डीएमआर 249ए स्टील प्लेट्स की आपूर्ति भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता को मजबूत करने के साथ-साथ कंपनी की तकनीकी दक्षता को भी प्रदर्शित करती है।
कंपनी का मानना है कि इन तीन नए नौसैनिक पोतों का नौसेना में शामिल होना स्वदेशी तकनीक और घरेलू विनिर्माण के दम पर भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा।
With inputs from IANS
