





कोलकाता: सरकारी रक्षा शिपयार्ड Garden Reach Shipbuilders and Engineers (GRSE) ने कोलकाता के Syama Prasad Mookerjee Port (SMP) के लिए 15 टन बोलार्ड पुल क्षमता वाले इलेक्ट्रिक टग के निर्माण और आपूर्ति की निविदा में सबसे कम बोली (L1) लगाई है।
ग्रीन शिपबिल्डिंग के क्षेत्र में GRSE पहले ही उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर चुका है। कंपनी West Bengal सरकार को शून्य-उत्सर्जन वाली पूरी तरह इलेक्ट्रिक फेरी सौंप चुकी है और फिलहाल 13 हाइब्रिड फेरियों का निर्माण कर रही है। इसके अलावा, एक जर्मन कंपनी के लिए 12 बहुउद्देश्यीय जहाज भी बनाए जा रहे हैं, जिनमें से चार ग्रीन प्रोपल्शन तकनीक से लैस होंगे।
प्रस्तावित इलेक्ट्रिक टग की लंबाई 25 मीटर और चौड़ाई 8 मीटर होगी। यह लिथियम टाइटेनेट ऑक्साइड (LTO) बैटरियों से संचालित होगा और 15 टन की स्टैटिक बोलार्ड पुल क्षमता प्रदान करेगा। बंदरगाहों पर सहायता और टोइंग कार्यों के लिए तैयार किए जा रहे इस टग की अधिकतम गति 9 नॉट होगी तथा यह लगातार दो घंटे तक संचालन करने में सक्षम होगा। इसके लिए समर्पित शोर-पावर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जाएगा। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 40 करोड़ रुपये है।


एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, परियोजना का आकार भले ही युद्धपोतों की तुलना में छोटा हो, लेकिन इसका महत्व ग्रीन शिपबिल्डिंग को बढ़ावा देने में है। केंद्र सरकार आने वाले वर्षों में देश के सभी पारंपरिक टगों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक टगों से बदलने की दिशा में काम कर रही है।
यह टग International Association of Classification Societies (IACS) के मानकों के अनुरूप बनाया जाएगा और इसमें उन्नत बैटरी-प्रोपल्शन तकनीक का इस्तेमाल होगा, जिससे बंदरगाहों पर कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और पर्यावरण-अनुकूल संचालन को बढ़ावा मिलेगा।


वर्ष 1960 में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (DPSU) बनने के बाद से GRSE अब तक 800 से अधिक जहाजों का निर्माण कर चुका है। इनमें Indian Navy, Indian Coast Guard और कई मित्र देशों के लिए बनाए गए 118 युद्धपोत शामिल हैं, जो भारत के किसी भी शिपयार्ड द्वारा निर्मित सर्वाधिक युद्धपोत हैं।
प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा नौसेना में शामिल किए गए युद्धपोत — INS Dunagiri, INS Sanshodhak और INS Agray — भी GRSE में ही निर्मित हुए थे।
वर्तमान में GRSE नौ युद्धपोतों और 30 वाणिज्यिक जहाजों के निर्माण पर कार्य कर रहा है। इनमें चार नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPV) शामिल हैं। इसके अलावा, कंपनी पांच नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट (NGC) के निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण अनुबंध को अंतिम रूप देने के उन्नत चरण में है।
With inputs from IANS
