भारत-जापान की रक्षा साझेदारी को नई मजबूती, नौसेना के लिए मिलकर बनाएंगे आधुनिक यूनिकॉर्न मस्तूलBy Admin Mon, 06 July 2026 04:44 PM

नई दिल्ली। भारत और जापान ने रक्षा क्षेत्र में संयुक्त विकास (को-डेवलपमेंट) के लिए अपना पहला द्विपक्षीय समझौता किया है। इस समझौते के तहत दोनों देश मिलकर भारतीय नौसेना के लिए अत्याधुनिक यूनिकॉर्न (यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना) संचार मस्तूल का विकास और निर्माण करेंगे। यह दोनों देशों की रणनीतिक और रक्षा साझेदारी में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

जापान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते की पहली परियोजना यूनिकॉर्न शिपबोर्न कम्युनिकेशन मस्तूल के विकास और लाइसेंस प्राप्त उत्पादन से जुड़ी है। यह उन्नत एकीकृत मस्तूल प्रणाली जापान की एनईसी कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित की गई है।

समझौते के तहत भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) जापानी साझेदारों के सहयोग से इस प्रणाली का निर्माण भारत में करेगी। जापान इसकी मूल डिजाइन और प्रमुख तकनीक उपलब्ध कराएगा, जबकि भारत प्रणाली का एकीकरण, स्थानीयकरण और उत्पादन करेगा। यह परियोजना केंद्र सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल के अनुरूप आगे बढ़ाई जाएगी।

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हालांकि यूनिकॉर्न प्रणाली का मूल विकास जापान में हुआ है, लेकिन भारत इसमें अपने स्वदेशी सेंसर और एंटीना भी जोड़ेगा। इसके बाद इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर लगाया जाएगा। आने वाले समय में यह प्रणाली नौसेना के मौजूदा संचार और सेंसर मस्तूलों की जगह ले सकती है।

भारत पिछले कई वर्षों से इस तकनीक में रुचि दिखा रहा था। नवंबर 2024 में दोनों देशों के बीच यूनिकॉर्न मल्टीफंक्शनल मस्तूल के निर्यात को लेकर समझौता हुआ था, जिसने अब संयुक्त विकास परियोजना का मार्ग प्रशस्त किया है।

यूनिकॉर्न, जिसे नोरा-50 के नाम से भी जाना जाता है, जापान की एनईसी कॉर्पोरेशन, सांपा कोग्यो कंपनी लिमिटेड और योकोहामा रबर कंपनी लिमिटेड ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इसे जापान के मोगामी श्रेणी के फ्रिगेट युद्धपोतों के लिए तैयार किया गया था। इस एकीकृत मस्तूल में संचार, निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से जुड़े कई एंटीना एक ही संरचना में लगाए गए हैं, जिससे जहाज पर अलग-अलग एंटीना की आवश्यकता कम हो जाती है।

इस प्रणाली में सर्वदिशीय निगरानी रडार, इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर (ईएसएम), वाई-फाई, लिंक-16, यूएचएफ ट्रांसमिट और रिसीव एंटीना, मित्र या शत्रु की पहचान प्रणाली (आईएफएफ), वीएचएफ/यूएचएफ संचार एंटीना, सामरिक नेविगेशन प्रणाली और बिजली से सुरक्षा के लिए लाइटनिंग कंडक्टर जैसी कई आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं।

इस एकीकृत डिजाइन से जहाज पर जगह का बेहतर उपयोग होता है, रखरखाव आसान हो जाता है और रडार पर जहाज की पहचान कम दिखाई देती है। इससे युद्धपोत की स्टील्थ क्षमता बढ़ती है और उसे दुश्मन के लिए पहचानना अधिक कठिन हो जाता है।

यूनिकॉर्न प्रणाली का विकास वर्ष 2015-16 के दौरान हुआ था और 2018 में इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया गया। इसे पहली बार 2019 में जापान के मोगामी श्रेणी के फ्रिगेट पर स्थापित किया गया था।

 

With inputs from IANS