
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अधिक मात्रा में एथाइल अल्कोहल (इथेनॉल) युक्त औषधीय उत्पादों की बिक्री और वितरण को लेकर नियमों को कड़ा कर दिया है। अब ऐसी दवाओं के निर्माण और बिक्री के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा और इन्हें केवल पंजीकृत डॉक्टर के पर्चे पर ही बेचा जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य इन दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाना है, जबकि जरूरतमंद मरीजों को इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि अब तक इलायची, अदरक और अन्य सुगंधित औषधीय टिंचर जैसे कई उत्पाद ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स नियमों के शेड्यूल-के के तहत लाइसेंस से छूट प्राप्त थे। हालांकि, इनमें से कुछ उत्पादों में 80 से 90 प्रतिशत तक एथाइल अल्कोहल होता है, जिसके कारण इनके नशे के लिए दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है। इस संबंध में कई राज्य सरकारों ने भी केंद्र को चिंता जताई थी।
नई व्यवस्था के तहत 12 प्रतिशत से अधिक एथाइल अल्कोहल (v/v) वाले और 30 मिलीलीटर से बड़े पैक में उपलब्ध सभी औषधीय उत्पाद अब शेड्यूल-के की छूट के दायरे में नहीं आएंगे। ऐसे उत्पादों के निर्माता और विक्रेताओं को अब ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत आवश्यक लाइसेंस लेना होगा।
सरकार ने इन उत्पादों को ड्रग्स रूल्स, 1945 के शेड्यूल-एच1 में भी शामिल कर दिया है। इसका मतलब है कि अब इनकी बिक्री केवल पंजीकृत चिकित्सक के वैध प्रिस्क्रिप्शन पर ही की जा सकेगी। साथ ही, इनकी बिक्री और वितरण का पूरा रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य होगा।
मंत्रालय के अनुसार, इस संशोधन से अल्कोहल युक्त औषधीय उत्पादों की आपूर्ति केवल अधिकृत दवा वितरण प्रणाली के माध्यम से होगी। इससे इनके अवैध उपयोग और गलत हाथों में पहुंचने की संभावना काफी कम होगी, जबकि वास्तविक मरीजों को उपचार के लिए आवश्यक दवाएं पहले की तरह उपलब्ध होती रहेंगी।
सरकार का कहना है कि यह कदम देश की दवा नियामक व्यवस्था को और मजबूत बनाने, दवाओं के जिम्मेदार एवं विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है। इस संबंध में विस्तृत संशोधन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राजपत्र (गजट) अधिसूचना के माध्यम से जारी कर दिए गए हैं।
With inputs from IANS