लद्दाख में ओएनजीसी ने खोदा दूसरा भू-तापीय कुआं, भारत के पहले जियोथर्मल बिजली संयंत्र की दिशा में बड़ी उपलब्धिBy Admin Mon, 13 July 2026 04:00 PM

नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) ने लद्दाख की पुग़ा घाटी में दूसरा भू-तापीय (जियोथर्मल) कुआं सफलतापूर्वक ड्रिल कर भारत के पहले पायलट जियोथर्मल बिजली संयंत्र की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।

ओएनजीसी के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ 'ओएनजीसी एनर्जी सेंटर' ने 14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित इस कुएं की ड्रिलिंग लगभग एक महीने में 1,000 मीटर की गहराई तक पूरी की। कंपनी के अनुसार, यह कार्य पहले अभियान की तुलना में कम समय और कम लागत में पूरा किया गया।

यह नया कुआं पुग़ा में पहले जियोथर्मल कुएं की सफलता पर आधारित है। पहले कुएं से पानी के उबलने के तापमान से भी अधिक तापमान वाली भाप निकली थी, जिससे इस क्षेत्र में भू-तापीय ऊर्जा की अपार संभावनाओं की पुष्टि हुई थी।

ओएनजीसी का कहना है कि दूसरा कुआं भारत के पहले 1 मेगावाट (एमडब्ल्यूई) क्षमता वाले पायलट जियोथर्मल बिजली संयंत्र के विकास में अहम भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही देश में भविष्य में व्यावसायिक स्तर पर जियोथर्मल ऊर्जा के उपयोग का मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है।

परियोजना के अगले चरण में 1 मेगावाट क्षमता का पायलट बिजली संयंत्र स्थापित करने और दीर्घकाल में लद्दाख को चौबीसों घंटे विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने के लिए जियोथर्मल संसाधनों का व्यापक विकास करने की योजना है।

पूर्वी लद्दाख स्थित पुग़ा जियोथर्मल क्षेत्र को भारत का सबसे संभावनाशील भू-तापीय ऊर्जा क्षेत्र माना जाता है। जियोथर्मल ऊर्जा पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद प्राकृतिक ऊष्मा का उपयोग कर बिजली उत्पादन और ताप उपलब्ध कराती है। यह सौर और पवन ऊर्जा की तुलना में अधिक भरोसेमंद मानी जाती है, क्योंकि इसका उत्पादन मौसम पर निर्भर नहीं होता।

हालांकि पुग़ा क्षेत्र में वर्षों से समय-समय पर खोज संबंधी कार्य किए जाते रहे हैं, लेकिन तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों के कारण अब तक व्यावसायिक स्तर पर जियोथर्मल बिजली उत्पादन शुरू नहीं हो सका है।

इस बीच, भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2014 में देश की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता 81 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर 288 गीगावाट हो गई है। इसी अवधि में सौर ऊर्जा क्षमता 2.8 गीगावाट से बढ़कर 155 गीगावाट और पवन ऊर्जा क्षमता 21 गीगावाट से बढ़कर 56.4 गीगावाट तक पहुंच चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आगे बढ़ते हुए बिजली उत्पादन, ऊर्जा भंडारण और पारेषण प्रणालियों के बेहतर एकीकरण के साथ-साथ राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड को और अधिक मजबूत बनाना आवश्यक होगा।

 

With inputs from IANS