
नई दिल्ली: भारतीय वैज्ञानिकों ने एक अत्याधुनिक अमोनिया गैस सेंसर विकसित किया है, जो कमरे के सामान्य तापमान पर ही अत्यंत कम मात्रा में मौजूद हानिकारक अमोनिया गैस का पता लगाने में सक्षम है। यह तकनीक औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
यह सेंसर बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (सीईएनएस) के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। यह संस्थान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अधीन एक स्वायत्त संस्था है। इसकी जानकारी मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।
अमोनिया का व्यापक उपयोग उर्वरक निर्माण, शीतलन प्रणाली, रासायनिक उद्योग और कृषि जैसे क्षेत्रों में किया जाता है। हालांकि, इसके संपर्क में आने से आंखों, त्वचा और श्वसन तंत्र में गंभीर जलन हो सकती है, जबकि लंबे समय तक संपर्क स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
इसी चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने वैनाडियम ऑक्साइड-वैनाडियम सल्फाइड (वीओएक्स/वीएस2) हेटेरोस्ट्रक्चर पर आधारित अत्यधिक संवेदनशील गैस सेंसर तैयार किया है। विशेष सतही परिवर्तन तकनीक की मदद से इसमें अमोनिया अणुओं को आकर्षित करने वाले सक्रिय स्थलों की संख्या बढ़ाई गई है, जिससे सेंसर की संवेदनशीलता और प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
यह सेंसर सामान्य वातावरण में भी तेजी और सटीकता के साथ अमोनिया गैस की पहचान कर सकता है तथा अन्य सामान्य गैसों की तुलना में बेहतर चयनात्मकता भी प्रदर्शित करता है।
वैज्ञानिकों ने इस तकनीक पर आधारित लचीले और पहनने योग्य सेंसर भी विकसित किए हैं, जिन्हें पॉलिमर, कागज और वस्त्र जैसे विभिन्न पदार्थों पर तैयार किया गया है। ये उपकरण मुड़ने, मोड़ने या खिंचने की स्थिति में भी प्रभावी ढंग से कार्य करते हैं, जिससे इन्हें भविष्य के पहनने योग्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।
तकनीक की उपयोगिता प्रदर्शित करने के लिए शोधकर्ताओं ने स्मार्ट बैंड, स्मार्ट होम चेतावनी प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक वस्त्र जैसे प्रोटोटाइप भी तैयार किए हैं, जो वास्तविक समय में अमोनिया गैस की निगरानी कर सकते हैं।
यह सेंसर 319 पार्ट्स प्रति बिलियन (पीपीबी) तक की बेहद कम अमोनिया सांद्रता का भी पता लगा सकता है, जो कार्यस्थलों के निर्धारित सुरक्षा मानकों से काफी नीचे है। इसके अलावा, इसने बार-बार परीक्षण के दौरान स्थिर प्रदर्शन, 10 सप्ताह से अधिक की दीर्घकालिक विश्वसनीयता तथा विभिन्न सांद्रताओं पर प्रभावी कार्यक्षमता भी प्रदर्शित की।
पारंपरिक गैस सेंसरों के विपरीत, जिन्हें काम करने के लिए अधिक तापमान या बाहरी ऊर्जा स्रोत की आवश्यकता होती है, यह नया सेंसर सामान्य कमरे के तापमान पर ही प्रभावी ढंग से कार्य करता है। इससे ऊर्जा की खपत कम होती है और इसे विभिन्न स्थानों पर आसानी से स्थापित किया जा सकता है।
शोधकर्ताओं ने एक पोर्टेबल निगरानी प्रणाली भी विकसित की है, जो अमोनिया की मात्रा निर्धारित सुरक्षा सीमा से अधिक होने पर तुरंत चेतावनी देती है। यह प्रणाली वातावरण को स्वतः सुरक्षित, चेतावनी और खतरे की श्रेणियों में वर्गीकृत करती है, जिससे बिना किसी तकनीकी विशेषज्ञता के भी त्वरित निर्णय लिया जा सकता है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसार, इस तकनीक का उपयोग औद्योगिक इकाइयों, रासायनिक भंडारण केंद्रों, प्रयोगशालाओं और कृषि क्षेत्रों में किया जा सकता है, जहां अमोनिया गैस के रिसाव का खतरा बना रहता है।
With inputs from IANS