भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने रचा इतिहास, 1,200 किमी दौड़कर बचाया 3,200 लीटर डीजलBy Admin Sun, 26 July 2026 10:41 AM

मुंबई: भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन ने 1,200 किलोमीटर से अधिक की सफल यात्रा पूरी कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस दौरान ट्रेन ने 3,200 लीटर से अधिक डीजल की बचत की। रेलवे मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि यह 10 कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई है और इसके संचालन के दौरान केवल जलवाष्प (वॉटर वेपर) निकलती है।

मंत्रालय के अनुसार, ट्रेन में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक अभिक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है, जिससे धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। यही वजह है कि इसे मौजूदा समय की सबसे स्वच्छ रेल प्रणोदन (प्रोपल्शन) तकनीक माना जा रहा है।

ट्रेन में दो हाइड्रोजन पावर कार हैं, जो मिलकर 2,400 किलोवाट की क्षमता प्रदान करती हैं। इसमें लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियां और हाइड्रोजन सिलेंडर लगाए गए हैं। हाइड्रोजन को 500 बार तक के दबाव पर संग्रहित किया जाता है और 350 बार के दबाव पर ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। इसकी कुल भंडारण क्षमता लगभग 3,000 किलोग्राम है।

सुरक्षा के लिए ट्रेन में गैस रिसाव, तापमान, आग और धुएं का पता लगाने वाली कई स्वतंत्र प्रणालियां लगाई गई हैं। इनके साथ स्वचालित शटडाउन, निरंतर वेंटिलेशन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप सभी आवश्यक परीक्षण भी किए गए हैं। जींद और सोनीपत के बीच सफल संचालन के बाद अब जल्द ही दिल्ली रूट पर इसके परीक्षण शुरू किए जाएंगे।

रेल मंत्रालय का कहना है कि यह परियोजना भारत में स्वदेशी हाइड्रोजन रेल पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) की मजबूत नींव रखेगी और देश को शून्य-उत्सर्जन रेल परिवहन की दिशा में आगे बढ़ाएगी।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन की तकनीक के बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपी) भारत के पास सुरक्षित हैं, जिससे भविष्य में इसके निर्यात का रास्ता भी खुलेगा। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन दुनिया भर में भविष्य का प्रमुख ईंधन बनकर उभर रहा है और भारतीय रेलवे ने इस दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं।

उन्होंने बताया कि रेलवे ने परिवहन क्षेत्र के लिए 2,400 किलोवाट क्षमता वाला पूर्णतः स्वदेशी हाइड्रोजन प्रोपल्शन सिस्टम विकसित किया है, जिसे इसी ट्रेन में लगाया गया है। यह उपलब्धि 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

With inputs from IANS