

नई दिल्ली: भारत के महत्वाकांक्षी भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन - BAS) परियोजना को लेकर सरकार ने गुरुवार को अहम जानकारी दी। सरकार ने बताया कि देश के पहले स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल BAS-01 वर्ष 2028 तक लॉन्च किया जाएगा, जबकि पांच मॉड्यूल वाले इस अंतरिक्ष स्टेशन को 2035 तक पूरी तरह स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
राज्यसभा में परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि BAS-01 का बेसलाइन डिजाइन रिव्यू और सिस्टम इंजीनियरिंग का काम पूरा हो चुका है। इसके तहत 31 बेसलाइन डिजाइन दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं, विभिन्न सब-सिस्टम के डिजाइन पर काम शुरू हो गया है और मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए प्रोटोटाइप हार्डवेयर विकसित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि गगनयान मिशन के तहत मानव-रेटेड लॉन्च व्हीकल (HLVM3), ऑर्बिटल मॉड्यूल, क्रू एस्केप सिस्टम, ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्लाइट ऑपरेशन एवं संचार नेटवर्क तथा क्रू रिकवरी सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

मंत्री ने बताया कि TV-D1, IADT-01 और IADT-02 जैसे प्रारंभिक परीक्षण मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। वहीं, पहले मानवरहित गगनयान मिशन G1 की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
उन्होंने कहा कि स्पेस स्टेशन के लिए डॉकिंग सिस्टम विकसित कर लिया गया है, जिसमें इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंटरफेस शामिल हैं। इसके अलावा, अंतरिक्ष में ईंधन भरने (रिफ्यूलिंग) की तकनीक का कॉन्सेप्ट डेमो भी सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया जा चुका है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए जरूरी तकनीकों, जैसे फ्लाइट सूट, व्यू पोर्ट, क्रू सीट और डॉकिंग तकनीक की पहचान कर ली गई है। फिलहाल गगनयान मिशन के लिए इनमें से कुछ तकनीकें बाहरी स्रोतों से ली जा रही हैं, लेकिन सरकार ने इनके स्वदेशी विकास को मंजूरी दे दी है।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के बाकी चार मॉड्यूल के स्वदेशी डिजाइन और विकास की मजबूत नींव तैयार होगी। साथ ही, मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और देश में नवाचार एवं हाई-टेक विनिर्माण को भी नई गति मिलेगी।
With inputs from IANS