रिपोर्ट: 2029 तक AI की 'अनुमानित जानकारी' बन सकती है निजता के लिए सबसे बड़ा खतराBy Admin Sat, 01 August 2026 02:41 PM

नई दिल्ली: वर्ष 2029 तक अधिकांश गोपनीयता (प्राइवेसी) से जुड़े मामलों की वजह सीधे तौर पर व्यक्तिगत जानकारी (PII) की चोरी नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा लोगों के बारे में लगाए गए अनुमान (इनफरेंस) होंगे। यह दावा रिसर्च और एडवाइजरी कंपनी गार्टनर (Gartner) की एक नई रिपोर्ट में किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जनरेटिव AI और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकें अब हमलावरों को सामान्य, गुमनाम (Anonymised) या एकत्रित (Aggregated) डेटा से भी किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, व्यवहार और अन्य संवेदनशील जानकारियों का अनुमान लगाने में सक्षम बना रही हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि नियामकीय नियमों और बढ़ती लागत के कारण कई संस्थान पहले की तुलना में कम व्यक्तिगत डेटा संग्रहित कर रहे हैं। इसके बावजूद AI की मदद से साइबर अपराधी अनुमान आधारित हमले (Inference Attacks) कर सकते हैं और संवेदनशील जानकारी हासिल कर सकते हैं।

गार्टनर के वाइस प्रेसिडेंट एनालिस्ट बार्ट विलेम्सेन ने कहा कि अब डेटा लीक से ज्यादा चिंता AI द्वारा निकाले गए निष्कर्षों की है। उनके अनुसार, अब तक संस्थाएं व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा पर ध्यान देती रही हैं, लेकिन AI बिना पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था को तोड़े भी लोगों के बारे में गहरे निजी निष्कर्ष निकाल सकता है।

उन्होंने बताया कि अनुमान आधारित हमले (Inference Attacks) खासतौर पर इसलिए खतरनाक हैं क्योंकि इन्हें पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियां आसानी से पहचान नहीं पातीं। ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति का डेटा सीधे लीक नहीं होता, बल्कि AI उसके बारे में ऐसे निष्कर्ष तैयार कर देता है, जिससे उसकी निजता प्रभावित हो सकती है। इन जोखिमों की पहचान करना, उन्हें समझना और रोकना भी काफी मुश्किल होता है।

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रिपोर्ट के अनुसार, 2028 तक कंपनियां डेटा की गोपनीयता (Confidentiality) के साथ-साथ डेटा की शुद्धता और विश्वसनीयता (Data Integrity) पर भी समान स्तर का निवेश करेंगी, ताकि AI द्वारा तैयार किए गए गलत, पक्षपातपूर्ण या अनधिकृत प्रोफाइल से होने वाले नुकसान को रोका जा सके।

गार्टनर ने चेतावनी दी कि जो संस्थाएं प्राइवेसी को केवल डेटा सुरक्षा का मुद्दा मानती रहेंगी, वे भविष्य में AI आधारित प्राइवेसी खतरों के प्रति अधिक संवेदनशील होंगी।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि संस्थानों को अपनी प्राइवेसी रणनीति में AI गवर्नेंस को शामिल करना चाहिए, डिफरेंशियल प्राइवेसी और सिंथेटिक डेटा जैसी प्राइवेसी बढ़ाने वाली तकनीकों का उपयोग करना चाहिए, साथ ही डेटा संग्रह को आवश्यक जरूरतों तक सीमित रखना, सख्त एक्सेस कंट्रोल लागू करना और समय पर डेटा हटाने जैसी प्रक्रियाओं को भी मजबूत करना चाहिए।

 

With inputs from IANS