वित्त वर्ष 2027-28 तक पॉलिमर करेंसी नोट जारी करने का लक्ष्य, फील्ड ट्रायल जारी : आरबीआई गवर्नरBy Admin Wed, 05 August 2026 01:36 PM









मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि केंद्रीय बैंक का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 तक पॉलिमर करेंसी नोटों को प्रचलन में लाना है। इससे पहले विभिन्न परिस्थितियों में इनके प्रदर्शन का आकलन करने के लिए फील्ड ट्रायल जारी है।

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के फैसलों की घोषणा के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में आईएएनएस से बातचीत करते हुए मल्होत्रा ने कहा कि पॉलिमर बैंक नोटों का पायलट प्रोजेक्ट अभी भी जारी है।

उन्होंने कहा, "पॉलिमर नोटों का पायलट ट्रायल चल रहा है। बाजार में जारी करने से पहले हम इन नोटों का परीक्षण करेंगे।"

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि फील्ड ट्रायल के नतीजों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद ही इन्हें व्यापक स्तर पर जारी करने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि केंद्रीय बैंक का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 तक पॉलिमर नोटों को प्रचलन में लाना है।

ADVERTISEMENT
Advertisement

गौरतलब है कि हाल ही में वित्त मंत्रालय ने संसद को बताया था कि सरकार ने आरबीआई के 10 रुपये और 20 रुपये मूल्यवर्ग के पॉलिमर करेंसी नोटों के फील्ड ट्रायल के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

सरकार के अनुसार, पायलट परियोजना के तहत आरबीआई 10 रुपये और 20 रुपये के एक-एक अरब (100 करोड़) पॉलिमर नोट जारी करेगा, ताकि भारतीय परिस्थितियों में उनकी टिकाऊ क्षमता और उपयोगिता का आकलन किया जा सके।

आरबीआई का मानना है कि पॉलिमर नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं। विशेष रूप से कम मूल्यवर्ग के नोट, जो अधिक प्रचलन में रहते हैं और जल्दी खराब हो जाते हैं, उनके बार-बार प्रतिस्थापन की लागत को इससे कम किया जा सकेगा।

पॉलिमर नोटों में पारदर्शी विंडो और उन्नत नकली-रोधी सुरक्षा फीचर्स जैसी आधुनिक तकनीकों को भी शामिल किया जा सकता है, जिससे उनकी सुरक्षा और मजबूत होगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कागजी मुद्रा को पूरी तरह समाप्त करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यदि पॉलिमर नोट जारी किए जाते हैं, तो वे मौजूदा कागजी नोटों के साथ समानांतर रूप से प्रचलन में रहेंगे।

आरबीआई ने यह भी कहा है कि देश के विभिन्न जलवायु क्षेत्रों और उपयोग की परिस्थितियों में फील्ड ट्रायल तथा परिचालन मूल्यांकन के परिणामों के आधार पर ही इनके व्यापक उपयोग पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

 

With inputs from IANS