




नई दिल्ली- फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स के संस्थापक अध्यक्ष और एयर इंडिया के पूर्व पायलट मीनू वाडिया ने कहा है कि भारत में विमानन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक स्वतंत्र एविएशन सेफ्टी बोर्ड का गठन किया जाना चाहिए और नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) में व्यापक स्तर पर बदलाव की जरूरत है।
आईएएनएस से बातचीत में वाडिया ने कहा कि विमानन नियामक के ढांचे और कामकाज को लेकर चिंताएं कोई नई बात नहीं हैं। पिछले कई दशकों से सरकार के सामने इन मुद्दों को उठाया जाता रहा है।
उन्होंने बताया कि फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने कई मौकों पर प्रधानमंत्री और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र लिखकर विमानन सुरक्षा में सुधार की मांग की है।


वाडिया ने कहा, "हमने प्रधानमंत्री और मंत्रालय को लिखा है कि हवाई सुरक्षा के लिए दो चीजें बेहद जरूरी हैं। पहली, एक स्वतंत्र सुरक्षा बोर्ड और दूसरी, DGCA के कार्यालय का पूरी तरह से पुनर्गठन।"
उन्होंने DGCA में तकनीकी विशेषज्ञता की कमी पर भी सवाल उठाए। वाडिया ने कहा कि जब वह वायुसेना से आने के बाद एयर इंडिया में शामिल हुए थे, तब DGCA के पूरे कार्यालय में एक भी एविएटर नहीं था और वहां मुख्य रूप से नौकरशाह ही थे।
उन्होंने कहा कि विमानन एक बेहद तकनीकी क्षेत्र है और इसके नियमन के लिए गहन तकनीकी जानकारी तथा व्यावहारिक परिचालन अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों की जरूरत होती है। ऐसे में केवल नौकरशाही व्यवस्था के भरोसे विमानन क्षेत्र को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना मुश्किल है।
वाडिया ने माना कि पिछले कुछ वर्षों में DGCA में कुछ बदलाव जरूर हुए हैं, लेकिन उनके मुताबिक नियामक का समग्र ढांचा और काम करने का तरीका विमानन क्षेत्र की तेजी से बढ़ती जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हुआ है।
फुकेत-दिल्ली उड़ान के दौरान विमान में महसूस किए गए तेज झटकों यानी टर्बुलेंस के बारे में पूछे जाने पर वाडिया ने कहा कि विमान यात्रा के दौरान टर्बुलेंस होना एक सामान्य घटना है और यह अलग-अलग मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण हो सकता है।
उन्होंने बताया कि गंभीर टर्बुलेंस अक्सर क्यूम्यलोनिम्बस जैसे बादलों से जुड़ा होता है, जबकि क्लियर-एयर टर्बुलेंस ऐसी स्थिति में भी हो सकता है जब आसमान में कोई स्पष्ट बादल दिखाई न दे।
वाडिया ने कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से में उड़ान भरने पर टर्बुलेंस का सामना होना असामान्य नहीं है और इसके अलग-अलग प्रकार होते हैं। उन्होंने बताया कि अधिकांश टर्बुलेंस बादलों से जुड़ी मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण उत्पन्न होता है।
With inputs from IANS

