Kusha Missile Test: भारत की एयर डिफेंस क्षमता को मिलेगी नई ताकत, ‘सुदर्शन चक्र’ मिशन में अहम भूमिकाBy Admin Mon, 10 August 2026 05:07 PM

भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में Kusha लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली का पहला परीक्षण एक अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, Kusha के सफल विकास और तैनाती से भारत को न केवल विदेशी रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि देश के बहुस्तरीय एयर डिफेंस नेटवर्क को भी नई मजबूती मिल सकती है।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, Kusha का पहला परीक्षण भारत के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह प्रणाली भविष्य के युद्धों में बैलिस्टिक मिसाइलों, लड़ाकू विमानों, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से निपटने के लिए तैयार किए जा रहे देश के स्वदेशी एयर डिफेंस नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।

यह प्रणाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सुदर्शन चक्र’ मिशन की व्यापक योजना से भी जुड़ी हुई है। इस मिशन का उद्देश्य 2035 तक देश के महत्वपूर्ण सैन्य और नागरिक ठिकानों को मिसाइल, ड्रोन, लड़ाकू विमान और अन्य हवाई खतरों से बचाने के लिए एक मजबूत और बहुस्तरीय सुरक्षा कवच तैयार करना है।

रिटायर्ड एयर मार्शल रवि गोपाल कृष्ण कपूर के मुताबिक, Kusha को भारत के मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम में आसानी से शामिल किया जा सकता है, क्योंकि इसे देश में ही विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ड्रोन और मिसाइलों के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल तथा पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के आने से हवाई खतरों की प्रकृति लगातार जटिल हो रही है। ऐसे में केवल एक मिसाइल सिस्टम पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग दूरी और क्षमताओं वाली प्रणालियों को एकीकृत करना जरूरी है।

S-400 और Akash के साथ बनेगा बहुस्तरीय सुरक्षा कवच

विशेषज्ञों के अनुसार, Kusha को भारत के मौजूदा S-400 Triumf एयर डिफेंस सिस्टम के साथ जोड़ा जा सकता है। S-400 लंबी दूरी की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि स्वदेशी Kusha इसी बाहरी सुरक्षा घेरे को मजबूत कर सकता है।

वहीं, Akash जैसी कम और मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां एयर डिफेंस की अंदरूनी परत के रूप में काम कर सकती हैं। इस तरह अलग-अलग रेंज की प्रणालियों को एक साथ जोड़कर देश के लिए बहुस्तरीय एयर डिफेंस नेटवर्क तैयार किया जा सकता है।

Kusha की भूमिका केवल बचाव तक सीमित नहीं

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि Kusha की भूमिका केवल दुश्मन के हवाई हमलों को रोकने तक सीमित नहीं रह सकती। इसकी क्षमता का इस्तेमाल विरोधी के लड़ाकू विमानों या हथियार प्रणालियों को उनके लक्ष्य तक पहुंचने से पहले रोकने के लिए भी किया जा सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आए हवाई खतरों के संदर्भ में भी आधुनिक युद्ध में लंबी दूरी की एयर डिफेंस प्रणालियों के महत्व को रेखांकित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के उन्नत लड़ाकू विमानों और लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों जैसी क्षमताओं को देखते हुए भारत के लिए मजबूत एयर डिफेंस नेटवर्क बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता होगी कम

Kusha के स्वदेशी होने का एक बड़ा फायदा यह माना जा रहा है कि भारत को इसके उत्पादन, रखरखाव और सॉफ्टवेयर पर अधिक नियंत्रण हासिल होगा। इससे विदेशी सप्लाई चेन में किसी तरह के व्यवधान की स्थिति में भारत की संवेदनशीलता कम हो सकती है।

दिल्ली स्थित सुरक्षा थिंक टैंक Indic Researchers Forum के रणनीतिक मामलों से जुड़े विशेषज्ञ श्रीनिवासन बालकृष्णन के मुताबिक, Kusha लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों, ड्रोन और अन्य हवाई हथियारों के खिलाफ प्रभावी प्रतिरोध क्षमता विकसित करने में मदद कर सकता है। उनके अनुसार, समान क्षमता वाली कई विदेशी प्रणालियों की तुलना में Kusha की लागत करीब आधी रहने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि Kusha के बिना ‘सुदर्शन चक्र’ का लक्ष्य अधूरा रह सकता है, जबकि इसके शामिल होने से भारत को देशभर में रणनीतिक और नागरिक महत्व वाले ठिकानों के लिए व्यापक सुरक्षा कवच तैयार करने में मदद मिलेगी।

क्या है ‘सुदर्शन चक्र’?

‘सुदर्शन चक्र’ को भारत की भविष्य की बहुस्तरीय एयर डिफेंस व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल सीमा या सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करना नहीं, बल्कि देश के महत्वपूर्ण नागरिक और रणनीतिक बुनियादी ढांचे को भी हवाई हमलों से सुरक्षित रखना है।

Kusha, S-400 और Akash जैसी अलग-अलग क्षमताओं वाली प्रणालियों के एकीकृत इस्तेमाल से भारत दुश्मन के किसी हवाई खतरे को अलग-अलग स्तरों पर रोकने की क्षमता विकसित कर सकता है।

भारत के लिए इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि आधुनिक युद्ध में ड्रोन, क्रूज मिसाइल, लंबी दूरी के हथियार और उन्नत लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में स्वदेशी और बहुस्तरीय एयर डिफेंस सिस्टम आने वाले वर्षों में भारत की रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।

 

With inputs from IANS