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केंद्र सरकार ने कथित तौर पर Google को ऐसे कई Firebase वेब डेवलपमेंट अकाउंट और पेज हटाने का निर्देश दिया है, जिनका इस्तेमाल प्रमुख सरकारी और निजी बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों की वेबसाइट और मोबाइल ऐप की नकल कर लोगों को ठगने के लिए किया जा रहा था।
रिपोर्टों के अनुसार, गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की ओर से Google को नोटिस भेजे गए। जांच के दौरान ऐसे कई पेज और डेटाबेस सामने आए, जो बैंकों के आधिकारिक Android ऐप जैसे दिखाई देते थे। इनका इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम कराने और क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने जैसे ऑफर देकर लोगों को जाल में फंसाने के लिए किया जा रहा था।
सरकारी नोटिस में चिन्हित 57 Firebase पेजों में से सात को फिशिंग पेज पाया गया, जो भारतीय स्टेट बैंक (SBI), ICICI Bank और Axis Bank जैसे प्रमुख बैंकों की पहचान की नकल कर रहे थे। कुछ अन्य वेबसाइटों के जरिए पीड़ितों के मोबाइल फोन से कथित तौर पर चुराई गई जानकारी भी एकत्र की जा रही थी। इसमें क्रेडिट कार्ड की जानकारी और वन-टाइम पासवर्ड (OTP) जैसे संवेदनशील डेटा शामिल थे।
Google के एक प्रवक्ता ने सरकार के नोटिस पर कहा कि कंपनी की नीतियां उसके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल फिशिंग, मैलवेयर और वित्तीय धोखाधड़ी के लिए करने पर स्पष्ट रूप से रोक लगाती हैं। कंपनी ने कहा कि वह भारत में I4C समेत कानून प्रवर्तन और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर यूजर सुरक्षा के लिए काम करती है और सरकारी नोटिसों की समीक्षा अपनी तय प्रक्रियाओं और लागू कानूनों के तहत करती है।
Google Cloud का हिस्सा Firebase एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसका इस्तेमाल मोबाइल एप्लिकेशन और वेबसाइट विकसित करने के साथ-साथ उन्हें होस्ट करने के लिए व्यापक रूप से किया जाता है। हालांकि, इस तरह के प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग फर्जी वेबसाइट और ऐप तैयार कर साइबर ठगी करने के लिए किया जाना जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारतीयों को 2025 में डिजिटल और साइबर धोखाधड़ी के कारण करीब 22,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। पिछले पांच वर्षों में यह आंकड़ा लगभग 52,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ऐसे में बैंकिंग संस्थानों की पहचान की नकल करने वाली वेबसाइटों पर कार्रवाई को डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी रोकने की व्यापक कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।
इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी डिजिटल भुगतान से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए सुरक्षा उपायों को मजबूत कर रहा है। उसकी डिजिटल भुगतान सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं में ग्राहक और भुगतान संबंधी डेटा की सुरक्षा के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा, पात्र मामलों में छोटे मूल्य की धोखाधड़ी से प्रभावित ग्राहकों के लिए मुआवजे की व्यवस्था भी की गई है। इसके तहत 50,000 रुपये तक की राशि की धोखाधड़ी के पात्र पीड़ितों को एकमुश्त 25,000 रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बैंकिंग से जुड़े किसी भी संदेश, लिंक या ऑफर पर कार्रवाई करने से पहले उसकी प्रामाणिकता जांचना बेहद जरूरी है। खासकर रिवॉर्ड प्वाइंट, कार्ड अपग्रेड या क्रेडिट लिमिट बढ़ाने के नाम पर मांगे गए OTP, कार्ड नंबर और अन्य बैंकिंग विवरण साझा करने से बचना चाहिए।
