अब पूरे देश में एक ही समय की व्यवस्था, IST को बनाया जाएगा आधिकारिक समय का साझा आधारBy IANS Mon, 31 August 2026 02:02 PM

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देश में अलग-अलग क्षेत्रों और संस्थानों में समय के इस्तेमाल को एक समान और अधिक सटीक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। उपभोक्ता मामले विभाग ने Legal Metrology (Indian Standard Time) Rules, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। इसके साथ ही भारतीय मानक समय यानी IST को देशभर में कानूनी, प्रशासनिक, वाणिज्यिक और अन्य आधिकारिक कार्यों के लिए साझा समय संदर्भ बनाने का रास्ता साफ हो गया है।

ये नियम 27 अगस्त को अधिसूचित किए गए हैं और सरकारी राजपत्र में प्रकाशित होने के 180 दिन बाद लागू होंगे। इस अवधि का मकसद सरकारी विभागों, बैंकों, कंपनियों, संस्थानों और अन्य संगठनों को अपने तकनीकी सिस्टम और प्रक्रियाओं में जरूरी बदलाव करने का पर्याप्त समय देना है।

समय की एकरूपता क्यों जरूरी?

आज समय सिर्फ घड़ी देखने तक सीमित नहीं रह गया है। बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, दूरसंचार, रेलवे, बिजली ग्रिड, कंप्यूटर नेटवर्क और सरकारी रिकॉर्ड जैसी सेवाओं में हर लेन-देन और गतिविधि के साथ सटीक टाइमस्टैम्प दर्ज होता है। कुछ मामलों में कुछ मिलीसेकंड का अंतर भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

एक समान IST संदर्भ लागू होने से बैंकिंग और डिजिटल भुगतान में लेन-देन के समय की रिकॉर्डिंग अधिक सटीक और भरोसेमंद हो सकती है। रेलवे और हवाई परिवहन जैसे क्षेत्रों में विभिन्न प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा दूरसंचार और इंटरनेट नेटवर्क के संचालन में समय का सटीक समन्वय काफी अहम है।

बिजली व्यवस्था और सरकारी रिकॉर्ड में भी फायदा

देश के बिजली नेटवर्क में उत्पादन, वितरण और ग्रिड के बीच तालमेल के लिए सटीक समय जरूरी होता है। इसी तरह कानूनी और सरकारी रिकॉर्ड, आपातकालीन सेवाओं तथा ऐसे कई काम, जहां घटनाओं का सही समय दर्ज करना जरूरी होता है, वहां एक समान समय व्यवस्था से विश्वसनीयता बढ़ सकती है।

सरकार का ‘वन नेशन, वन टाइम’ अभियान इसी उद्देश्य से एक सुरक्षित और समान समय-वितरण व्यवस्था तैयार करने पर केंद्रित है।

देश में तैयार हो रहा स्वदेशी टाइमिंग नेटवर्क

इस पहल के तहत सरकार भारतीय संस्थानों और Legal Metrology प्रयोगशालाओं के माध्यम से देशभर में सटीक IST पहुंचाने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार कर रही है। इसमें भारत के स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम NavIC के साथ अन्य स्वीकृत भारतीय टाइमिंग स्रोतों का इस्तेमाल किया जाएगा।

फिलहाल कई तकनीकी प्रणालियां समय निर्धारण के लिए विदेशी सैटेलाइट आधारित स्रोतों पर निर्भर रहती हैं। ऐसे में स्वदेशी टाइम-डिसेमिनेशन नेटवर्क तैयार होने से देश की महत्वपूर्ण डिजिटल और बुनियादी सेवाओं को एक अतिरिक्त और घरेलू स्रोत मिलेगा। इससे बाहरी समय-संदर्भ प्रणालियों पर निर्भरता भी कम करने में मदद मिल सकती है।

बेंगलुरु में हो चुका है तकनीकी परीक्षण

इस दिशा में जुलाई 2026 में बेंगलुरु स्थित Regional Reference Standard Laboratory में White Rabbit Technology पर आधारित Indian Standard Time Dissemination Demonstration Network शुरू किया गया था। इस नेटवर्क ने बैंकिंग, दूरसंचार, बिजली, परिवहन और डिजिटल गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों के लिए IST के सटीक वितरण की क्षमता का प्रदर्शन किया है।

सरकार ने CSIR-NPL, ISRO, SEBI, NSE, BSNL और अन्य संबंधित संस्थानों के सहयोग से बेंगलुरु स्थित RRSL और NSE चेन्नई के बीच भारतीय मानक समय के सुरक्षित प्रसार का प्रदर्शन भी किया है।

180 दिन का समय क्यों दिया गया?

नए नियम तुरंत लागू करने के बजाय सरकार ने 180 दिन की संक्रमण अवधि रखी है। इस दौरान संबंधित संस्थान अपने मौजूदा सिस्टम की जांच करेंगे, तकनीकी बदलाव करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके नेटवर्क और रिकॉर्ड नई समय व्यवस्था के अनुरूप काम कर सकें।

व्यापक स्तर पर देखें तो ‘वन नेशन, वन टाइम’ व्यवस्था का असर सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगा। जैसे-जैसे देश की अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक सेवाएं डिजिटल होती जा रही हैं, सटीक और एक समान समय का महत्व भी बढ़ता जा रहा है। खासकर बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, संचार, परिवहन और बिजली जैसे क्षेत्रों में एक भरोसेमंद स्वदेशी समय प्रणाली भविष्य में डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और विश्वसनीयता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

नए नियम लागू होने के बाद देशभर में आधिकारिक कामकाज के लिए IST को साझा समय संदर्भ के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम पूरा हो जाएगा।