‘वन नेशन, वन टाइम’ को मिली कानूनी मंजूरी, देशभर में एक समान भारतीय मानक समय लागू करने की तैयारीBy IANS Thu, 03 September 2026 11:41 AM

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देश में डिजिटल और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने ‘वन नेशन, वन टाइम’ पहल के तहत भारतीय मानक समय (आईएसटी) को देश के साझा और कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त समय संदर्भ के रूप में स्थापित करने के लिए नए नियम अधिसूचित किए हैं।

सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) रूल्स, 2026 जारी किए हैं। ये नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से 180 दिन बाद लागू होंगे। इनका उद्देश्य देशभर में समय की गणना, रखरखाव, प्रसार और इस्तेमाल के लिए एक समान कानूनी और तकनीकी व्यवस्था तैयार करना है।

सरकार के अनुसार, आज के डिजिटल दौर में सही समय का महत्व केवल घड़ी मिलाने तक सीमित नहीं है। दूरसंचार नेटवर्क, बैंकिंग और डिजिटल भुगतान, बिजली ग्रिड, परिवहन व्यवस्था, डेटा सेंटर और सरकारी सूचना प्रणालियां सटीक समय के तालमेल पर निर्भर करती हैं। अलग-अलग प्रणालियों में समय का मामूली अंतर भी बड़े पैमाने पर लेनदेन, नेटवर्क संचालन और डिजिटल सेवाओं में समस्या पैदा कर सकता है।

इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू साइबर सुरक्षा भी है। किसी साइबर हमले या सुरक्षा संबंधी घटना के दौरान अलग-अलग कंप्यूटर और नेटवर्क प्रणालियों में दर्ज समय के आधार पर घटनाओं का क्रम समझा जाता है। यदि प्रणालियों के समय में अंतर हो तो जांच और सुरक्षा निगरानी प्रभावित हो सकती है। सरकार ने बताया कि 2023 की सीईआरटी-इन सूचना सुरक्षा दिशानिर्देशों में भी सरकारी सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी प्रणालियों को एनपीएल और एनआईसी जैसे मानक समय स्रोतों के साथ सिंक्रोनाइज करने की सिफारिश की गई है।

भारतीय मानक समय को देश के हर हिस्से तक भरोसेमंद तरीके से पहुंचाने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी स्तर पर भी बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है। सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनपीएल), इसरो और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के लीगल मेट्रोलॉजी विभाग ने मिलकर पांच क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशालाओं में द्वितीयक समय पैमाने स्थापित किए हैं।

ये प्रयोगशालाएं अहमदाबाद, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, फरीदाबाद और गुवाहाटी में स्थित हैं। इन केंद्रों के समय पैमाने को सीएसआईआर-एनपीएल द्वारा बनाए रखे जाने वाले भारतीय मानक समय से लगातार जोड़ा गया है। इससे देश के अलग-अलग क्षेत्रों में आईएसटी के भरोसेमंद और प्रमाणित प्रसार के लिए एक विकेंद्रीकृत नेटवर्क तैयार हुआ है।

इसके अलावा, सीएसआईआर-एनपीएल भारतीय मानक समय को इसरो के साथ भी ट्रेस करने योग्य बनाता है, जिससे नाविक (NavIC) प्रणाली के माध्यम से उपग्रह आधारित भारतीय मानक समय उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे देश की समय सेवाओं की पहुंच और मजबूती बढ़ने की उम्मीद है।

आईएसटी को नेटवर्क आधारित तकनीकों जैसे एनटीपी और पीटीपी के जरिए भी वितरित किया जा सकता है। वहीं, बेहद सटीक समय और आवृत्ति समन्वय की जरूरत वाले क्षेत्रों के लिए ‘व्हाइट रैबिट’ जैसी उच्च-सटीकता वाली ऑप्टिकल फाइबर तकनीक का भी परीक्षण किया जा रहा है।

नई व्यवस्था का लाभ सामान्य डिजिटल प्रणालियों से लेकर उन क्षेत्रों तक पहुंच सकता है जहां माइक्रोसेकंड या उससे भी अधिक सटीक समय समन्वय की जरूरत होती है। विशेष रूप से वित्तीय लेनदेन, दूरसंचार, बिजली व्यवस्था, डिजिटल बुनियादी ढांचे और सुरक्षा प्रणालियों में एक समान समय संदर्भ संचालन को अधिक विश्वसनीय बना सकता है।

सरकार के मुताबिक, नए नियम आईएसटी को व्यापक रूप से अपनाने के लिए कानूनी आधार उपलब्ध कराएंगे, जबकि सीएसआईआर-एनपीएल, एनआईसी, इसरो और क्षेत्रीय संदर्भ प्रयोगशालाओं का नेटवर्क इसके तकनीकी क्रियान्वयन को संभव बनाएगा।

लीगल मेट्रोलॉजी विभाग इस व्यवस्था के तहत नियामक और प्रवर्तन प्राधिकरण के रूप में काम करेगा। वहीं, देश का राष्ट्रीय मेट्रोलॉजी संस्थान सीएसआईआर-एनपीएल भारतीय मानक समय की वैज्ञानिक सटीकता और उसकी ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाएगा।

‘वन नेशन, वन टाइम’ व्यवस्था के जरिए सरकार का लक्ष्य देश में समय को लेकर एक साझा मानक स्थापित करना है, ताकि तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सेवाएं एक भरोसेमंद, सुरक्षित और समान समय संदर्भ पर काम कर सकें।