चीन पर निर्भरता घटाने के लिए म्यांमार से दुर्लभ खनिज सहयोग बढ़ा रहा भारत: रिपोर्टBy IANS Sat, 05 September 2026 04:30 PM

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भारत ने चीन पर महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अपनी निर्भरता कम करने और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुरक्षित बनाने के प्रयासों के तहत उत्तरी म्यांमार से दुर्लभ मृदा तत्वों यानी रेयर अर्थ मिनरल्स की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। म्यांमार स्थित प्रकाशन मिजिमा की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत म्यांमार से दुर्लभ मृदा खनिजों की खरीद के लिए कई द्विपक्षीय व्यवस्थाओं पर काम कर रहा है और इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय बातचीत भी तेज हुई है।

जून 2026 में दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण खनिजों, व्यापार, सुरक्षा और संपर्क व्यवस्था को लेकर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के बीच नई दिल्ली में हुई बातचीत में दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जनसंपर्क संबंधों का भी उल्लेख किया गया।

रिपोर्ट में म्यांमार में भारत के राजदूत के जुलाई में दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा गया कि दुर्लभ मृदा खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को उच्चतम स्तर पर महत्व दिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत से खनन और खनिज क्षेत्र में सहयोग को नई गति देने का आधार तैयार हुआ है। इसमें दुर्लभ मृदा तत्वों और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के अलावा तकनीकी आदान-प्रदान, कारोबारी साझेदारी और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि म्यांमार में दुर्लभ मृदा खनिजों का उत्पादन हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है और देश अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है। चीन द्वारा महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात पर नियंत्रण कड़ा किए जाने के बीच भारत म्यांमार के खनिज भंडार को एक संभावित रणनीतिक विकल्प के रूप में देख रहा है।

हालांकि, इस सहयोग के सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं। उत्तरी म्यांमार में दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार ऐसे दुर्गम, पहाड़ी और संघर्ष प्रभावित इलाकों में स्थित हैं, जहां खनन और परिवहन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा सीमित है।

इसके अलावा, खनिज संपदा वाले कई क्षेत्रों पर काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी (केआईए) जैसे जातीय सशस्त्र समूहों का नियंत्रण है। इन समूहों और म्यांमार की सैन्य सत्ता के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है, जिससे खनिजों के सुरक्षित और नियमित परिवहन को लेकर भी चुनौतियां बनी हुई हैं।

रिपोर्ट ने भारत को म्यांमार प्रशासन के साथ सहयोग मजबूत करने के साथ-साथ खनन क्षेत्र में कारोबारी, लॉजिस्टिक और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ाने की जरूरत बताई है।

भारत ने अपनी रणनीतिक और हरित ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन भी शुरू किया है। इसका उद्देश्य सौर फोटोवोल्टिक सेल, पवन टर्बाइन के लिए चुंबक, इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी और उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को मजबूत करना है।

दुर्लभ मृदा तत्व आधुनिक उद्योग और रक्षा तकनीक के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल माने जाते हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टर्बाइनों, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई उन्नत तकनीकों में इनका इस्तेमाल होता है। ऐसे में इनके लिए वैकल्पिक और भरोसेमंद आपूर्ति स्रोत विकसित करना भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है।