समुद्र के पानी से यूरेनियम निकालने की नई तकनीक विकसित, आईआईएससी की बड़ी उपलब्धिBy IANS Mon, 07 September 2026 11:03 AM

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भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने समुद्री जल से यूरेनियम निकालने की अधिक प्रभावी तकनीक विकसित की है। यह तकनीक भूजल से यूरेनियम जैसे प्रदूषकों को हटाने में भी उपयोगी साबित हो सकती है।

परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए यूरेनियम एक महत्वपूर्ण ईंधन है। जमीन पर उपलब्ध यूरेनियम भंडार सीमित होने के कारण वैज्ञानिक लंबे समय से समुद्री जल में मौजूद यूरेनियम को निकालने के तरीकों पर काम कर रहे हैं। अनुमान के अनुसार, जमीन पर करीब 75 लाख टन यूरेनियम उपलब्ध है, जबकि समुद्री जल में इसकी मात्रा लगभग 4.5 अरब टन मानी जाती है।

आईआईएससी के भौतिकी विभाग की टीम ने इसके लिए विशेष रूप से तैयार ‘स्लिप्ड कोवेलेंट ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क’ (सीओएफ) झिल्ली का इस्तेमाल किया। शोध के अनुसार, यह झिल्ली यूरेनियम के आयनों को पूरी तरह रोक सकती है, जबकि समुद्री जल में मौजूद सामान्य आयनों को इसके पार जाने देती है।

शोधकर्ताओं ने आणविक स्तर पर यह समझने का प्रयास किया कि झिल्ली अलग-अलग आयनों को किस तरह नियंत्रित करती है। अध्ययन में पाया गया कि सीओएफ की परतों की विशेष संरचना आयनों की गति को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पारंपरिक तरीकों में यूरेनियम को चुनिंदा रूप से पकड़ने के लिए विशेष रासायनिक समूहों का इस्तेमाल किया जाता है। समुद्री जल में बड़ी मात्रा में मौजूद अन्य आयनों के कारण ऐसी विधियों में चयनात्मकता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। नई तकनीक में मुख्य रूप से झिल्ली की नैनोस्तरीय संरचना का उपयोग कर आयनों की आवाजाही नियंत्रित की जाती है।

आईआईएससी के अनुसार, यह अध्ययन भविष्य में समुद्री जल से परमाणु ईंधन के लिए यूरेनियम प्राप्त करने और भूजल में यूरेनियम प्रदूषण कम करने के लिए अधिक चयनात्मक पृथक्करण तकनीक विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार प्रदान कर सकता है।

यह शोध योगेंद्र कुमार और बिनु वर्गीज ने प्रबल के. मैती के मार्गदर्शन में किया। इसमें बेंगलुरु स्थित एक्सेंचर लैब्स ने भी सहयोग किया।