भारत से साझेदारी चाहता है फिलीपींस, ISRO की विशेषज्ञता से मजबूत करना चाहता है अपना अंतरिक्ष कार्यक्रमBy IANS Thu, 10 September 2026 04:40 PM

Photo: IANS

फिलीपींस अपने घरेलू अंतरिक्ष कार्यक्रम को मजबूत करने के लिए भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहा है। देश तेजी से उपग्रह तकनीक, प्रक्षेपण प्रणालियों और अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ा रहा है और ऐसे में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की विशेषज्ञता उसके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

द मनीला टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, फिलीपीन स्पेस एजेंसी (PhilSA) भारत के साथ करीबी सहयोग के जरिए किफायती इंजीनियरिंग विशेषज्ञता, उपग्रह विकास की क्षमता और अंतरिक्ष क्षेत्र में तकनीकी अनुभव हासिल कर सकती है। दोनों देशों के विकासशील अर्थतंत्र होने के कारण अंतरिक्ष तकनीक के व्यावहारिक और कम लागत वाले इस्तेमाल को लेकर भी साझा प्राथमिकताएं बन सकती हैं।

फिलीपींस फिलहाल कृषि, आपदा प्रबंधन, जलवायु निगरानी और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इसी दिशा में PhilSA 130 किलोग्राम वजनी मल्टीस्पेक्ट्रल यूनिट फॉर लैंड असेसमेंट उपग्रह विकसित कर रही है। इस उपग्रह का इस्तेमाल सटीक कृषि, तटीय सुरक्षा और आपदा जोखिम प्रबंधन जैसे कार्यों में किया जाना है।

एजेंसी स्थानीय सरकारों और नागरिक संगठनों के बीच उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए भी कई कार्यक्रम चला रही है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष तकनीक को केवल वैज्ञानिक अनुसंधान तक सीमित रखने के बजाय उसे रोजमर्रा के प्रशासन और विकास कार्यों से जोड़ना है।

फिलीपींस की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को हाल में राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर की एक घोषणा से भी बढ़ावा मिला। उन्होंने कागायन प्रांत में एक स्पेसपोर्ट स्थापित करने की योजना का ऐलान किया है। उनके अनुसार, घरेलू अंतरिक्ष क्षमताओं का विकास आर्थिक वृद्धि, राष्ट्रीय सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए महत्वपूर्ण है।

तकनीकी क्षमता विकसित करने के प्रयासों के तहत PhilSA दक्षिण कोरियाई एयरोस्पेस कंपनी पेरिजी एयरोस्पेस के साथ भी काम कर रही है। दोनों एक साउंडिंग रॉकेट मिशन पर सहयोग कर रहे हैं, जिसमें फिलीपींस द्वारा विकसित पेलोड ले जाया जाएगा।

वहीं, भारत भी अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को दीर्घकालिक और अधिक महत्वाकांक्षी दिशा में आगे बढ़ा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के स्पेस विजन 2047 में गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन के साथ-साथ चंद्रमा और शुक्र से जुड़े भविष्य के मिशन भी शामिल हैं।

भारत की खासियत केवल ISRO की संस्थागत क्षमता तक सीमित नहीं है। देश में निजी अंतरिक्ष कंपनियों का पारिस्थितिकी तंत्र भी तेजी से विकसित हुआ है। हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस को इसकी प्रमुख मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने विक्रम श्रृंखला के प्रक्षेपण यान विकसित किए हैं और भारत के पहले निजी तौर पर विकसित रॉकेट के प्रक्षेपण की उपलब्धि हासिल की है।

भारत के सरकारी अंतरिक्ष कार्यक्रम के साथ निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी ने देश को अंतरिक्ष क्षेत्र में एक व्यापक वाणिज्यिक पारिस्थितिकी तंत्र की ओर आगे बढ़ाया है। ऐसे में फिलीपींस जैसे देश के लिए भारत के साथ सहयोग केवल उपग्रह तकनीक तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसमें रॉकेट इंजीनियरिंग, अंतरिक्ष अनुप्रयोग, क्षमता निर्माण और निजी क्षेत्र की भागीदारी जैसे क्षेत्र भी शामिल हो सकते हैं।

फिलीपींस के लिए भारत के साथ साझेदारी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि वह अपनी अंतरिक्ष जरूरतों के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय धीरे-धीरे स्वदेशी क्षमताएं विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत का अपेक्षाकृत कम लागत वाला अंतरिक्ष मॉडल और तेजी से उभरता निजी क्षेत्र इस प्रक्रिया में उसके लिए उपयोगी साझेदार साबित हो सकता है।