भारत की शुरुआती 6G साझेदारी से वैश्विक मानक तय करने में बढ़ेगा प्रभावBy IANS Fri, 11 September 2026 08:52 AM

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भारत के लिए 6G तकनीक की वैश्विक दौड़ में शुरुआती स्तर पर सक्रिय भागीदारी रणनीतिक बढ़त साबित हो सकती है। अमेरिका समेत 24 अन्य देशों के साथ 6G नेतृत्व और सुरक्षा से जुड़ी पहल में शामिल होकर भारत अब अगली पीढ़ी के मोबाइल नेटवर्क के मानकों, स्पेक्ट्रम नीति और सुरक्षा ढांचे को तय करने वाली चर्चाओं में सीधे भूमिका निभा सकेगा।

इंडिया नैरेटिव की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम भारत को केवल मोबाइल तकनीक के एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि उन नियमों, नेटवर्क आर्किटेक्चर और भरोसेमंद तकनीकी ढांचे के सह-निर्माता के रूप में स्थापित कर सकता है, जो 2030 के दशक के डिजिटल नेटवर्क को आकार देंगे।

यह निर्णय केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक के बीच जी20 इनोवेशन मिनिस्ट्रियल के दौरान हुई बैठक के बाद सामने आया। इससे भारतीय शोधकर्ताओं, दूरसंचार कंपनियों, चिप डिजाइनरों और स्टार्टअप्स को स्पेक्ट्रम, साइबर सुरक्षा, नेटवर्क इंटरऑपरेबिलिटी और तकनीकी मानकों से जुड़ी चर्चाओं में शुरुआती स्तर पर अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, वायरलेस संचार के क्षेत्र में शुरुआती दौर में तकनीकी मानक तय करने में भूमिका निभाने वाले देशों को अक्सर पेटेंट, उपकरण निर्माण और संबंधित बाजारों में बड़ा लाभ मिलता है। ऐसे में भारत की समय रहते भागीदारी भविष्य में केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता ही नहीं, बल्कि वैश्विक 6G आपूर्ति श्रृंखला में उसकी हिस्सेदारी बढ़ाने में भी मदद कर सकती है।

भारत ने 'कॉल टू एक्शन फॉर 6G लीडरशिप एंड सिक्योरिटी' में शामिल होकर नेटवर्क सुरक्षा, इंटरऑपरेबिलिटी, नेटवर्क की मजबूती और विश्वसनीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में साझा दृष्टिकोण का समर्थन किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वॉशिंगटन की ओर से जारी पहल की भाषा विशेष रूप से स्पष्ट है। इसमें 6G नेटवर्क को देशों के साझा सुरक्षा हितों के अनुरूप विकसित करने, प्रतिस्पर्धा मजबूत करने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

6G के तकनीकी विकास पर औपचारिक काम 2027 के आसपास तेज होने की उम्मीद है, जबकि भारत का 'भारत 6G एलायंस' वर्ष 2030 तक 6G सेवाओं की शुरुआत के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसे में भारत का इस स्तर पर वैश्विक गठबंधन में शामिल होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

6G का दायरा मौजूदा 4G और 5G नेटवर्क से कहीं व्यापक होगा। यह केवल तेज इंटरनेट, वीडियो या वॉयस सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि औद्योगिक नियंत्रण प्रणाली, स्वायत्त लॉजिस्टिक्स, उन्नत सेंसर नेटवर्क, रक्षा से जुड़े अनुप्रयोगों और बड़े पैमाने पर एआई आधारित सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा बन सकता है।

रिपोर्ट ने भरोसेमंद वेंडरों, सुरक्षित सप्लाई चेन और नेटवर्क में एआई के इस्तेमाल से जुड़े सुरक्षा मानकों को 6G के डिजाइन चरण से ही प्राथमिकता देने को रणनीतिक आवश्यकता बताया है।

जितिन प्रसाद ने अमेरिकी अधिकारी के साथ बैठक में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 में अमेरिका की अधिक भागीदारी, एआई तकनीक में सहयोग बढ़ाने और एआई सुरक्षा उपायों के लिए व्यावहारिक तंत्र विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया।

भारत के पास बड़े पैमाने पर डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का अनुभव, तेजी से विकसित हो रहा सेमीकंडक्टर निर्माण और चिप डिजाइन क्षेत्र तथा मजबूत सॉफ्टवेयर प्रतिभा है। यही क्षमताएं भारत को 6G की वैश्विक चर्चा में केवल एक बड़े उपभोक्ता बाजार के बजाय तकनीक और मानक निर्माण में योगदान देने वाली ताकत बना सकती हैं।