भारतीय समुद्री क्षेत्र में पकड़ी गई टूना मछली सुरक्षित, ब्राजील की रिपोर्ट से घबराने की जरूरत नहीं: CMFRIBy IANS Wed, 23 September 2026 04:52 PM

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भारतीय तट के आसपास पकड़ी जाने वाली टूना मछली खाने के लिए सुरक्षित है और ब्राजील के समुद्री क्षेत्र में मछलियों में पाए गए परजीवियों की रिपोर्ट के आधार पर भारतीय मछलियों को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) ने मंगलवार को यह स्पष्ट किया।

CMFRI की यह प्रतिक्रिया अटलांटिक महासागर में ब्राजील के तट के पास पकड़ी गई स्किपजैक टूना में परजीवी पाए जाने की खबरों के बाद सामने आई है। इन रिपोर्टों के कारण टूना समेत अन्य समुद्री मछलियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे थे।

CMFRI के निदेशक डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज ने कहा कि किसी एक भौगोलिक क्षेत्र में मिले परजीवियों को भारतीय जलक्षेत्र में पकड़ी जाने वाली मछलियों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “उपभोक्ताओं को केवल इसलिए टूना या बाजार में उपलब्ध अन्य मछलियों से परहेज करने की जरूरत नहीं है क्योंकि किसी खास भौगोलिक क्षेत्र की मछलियों में परजीवी पाए गए हैं।”

संस्थान के वैज्ञानिक नियमित रूप से विभिन्न प्रजातियों की मछलियों की जांच करते हैं और उनमें किसी तरह की असामान्यता या परजीवी की मौजूदगी का अध्ययन करते हैं। स्किपजैक टूना भी इन जैविक अध्ययनों का हिस्सा है। डॉ. जॉर्ज के मुताबिक, CMFRI द्वारा जांची गई मछलियों में हानिकारक परजीवी संक्रमण के बाहरी संकेत नहीं मिले हैं।

उन्होंने बताया कि मछलियों में परजीवियों की मौजूदगी अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में अलग हो सकती है। इसका संबंध स्थानीय पारिस्थितिक परिस्थितियों से होता है। परजीवियों के जीवन चक्र में भूमिका निभाने वाले कोपेपोड जैसे मध्यवर्ती या द्वितीयक मेजबानों की उपलब्धता भी उनकी संख्या को प्रभावित कर सकती है।

वैज्ञानिक मछलियों में पाए जाने वाले परजीवियों का इस्तेमाल विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद मछली समूहों और उनकी आबादी की पहचान तथा उनके बीच अंतर समझने के लिए भी करते हैं। इसलिए ब्राजील के समुद्री क्षेत्र में टूना में पाए गए परजीवियों के आधार पर भारतीय तट से पकड़ी जाने वाली टूना की खाद्य सुरक्षा का आकलन नहीं किया जा सकता।

हालांकि, CMFRI ने मछली की सफाई और पकाने के दौरान खाद्य सुरक्षा के नियमों का पालन करने की सलाह दी है। मछली की प्रोसेसिंग के दौरान आंतों और अन्य आंतरिक अंगों को जल्द से जल्द निकालना, मछली को अच्छी तरह साफ करना और उसके बाद पर्याप्त तापमान पर पूरी तरह पकाना महत्वपूर्ण है।

संस्थान के अनुसार, उच्च तापमान पर अच्छी तरह पकाने से परजीवी नष्ट हो जाते हैं और उनसे जुड़े खाद्य सुरक्षा जोखिम काफी कम हो जाते हैं। यह सावधानी उन देशों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जहां कच्ची या हल्की पकी हुई मछली और समुद्री भोजन खाने का चलन अधिक है।

भारत में आम तौर पर मछली को अच्छी तरह और उच्च तापमान पर पकाकर खाया जाता है, जिससे परजीवियों से जुड़े जोखिम को कम करने में अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है।

डॉ. जॉर्ज ने कहा कि उपभोक्ताओं को किसी विशेष क्षेत्र से आई परजीवी संबंधी रिपोर्ट के कारण टूना खाना बंद करने के बजाय मछली की उचित सफाई, रखरखाव और अच्छी तरह पकाने पर ध्यान देना चाहिए।

टूना भारत में व्यापक रूप से खाई जाने वाली मछलियों में शामिल है और यह प्रोटीन तथा अन्य पोषक तत्वों का महत्वपूर्ण स्रोत है। CMFRI ने दोहराया कि ब्राजील से सामने आई परजीवी संबंधी रिपोर्टों के आधार पर भारतीय जलक्षेत्र में पकड़ी गई टूना का सेवन बंद करने की कोई जरूरत नहीं है।