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भारत 114 राफेल लड़ाकू विमानों की बहुप्रतीक्षित खरीद का सौदा वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक अंतिम रूप दे सकता है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने शनिवार को कहा कि यदि मौजूदा प्रक्रिया निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ती है तो इस अवधि तक समझौता पूरा होने की संभावना है।
वायुसेना दिवस से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर चीफ मार्शल सिंह ने बताया कि प्रस्तावित मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) सौदे को लेकर कीमत और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत जारी है। इस प्रस्तावित खरीद की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है।
भारत ने फरवरी में 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। यह भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिए देश के सबसे बड़े रक्षा खरीद अभियानों में से एक है। प्रस्तावित सौदा फ्रांस के साथ सरकार-से-सरकार व्यवस्था के तहत किया जा रहा है।
करीब दो दशक पहले शुरू हुई इस प्रक्रिया का उद्देश्य भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान बेड़े को मजबूत करना और राफेल विमानों की संख्या बढ़ाना है। सौदा पूरा होने के बाद भारत के पास कुल राफेल विमानों की संख्या 176 हो जाएगी। इसमें वायुसेना के पास पहले से मौजूद 36 राफेल और भारतीय नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए 26 राफेल-एम लड़ाकू विमान भी शामिल होंगे।
राफेल-एम विमानों को भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोतों पर तैनात करने के लिए इस्तेमाल किया जाना है। इस तरह प्रस्तावित नए सौदे से वायुसेना की क्षमता बढ़ने के साथ भारत के पास जमीन और समुद्र, दोनों मोर्चों के लिए राफेल का बड़ा बेड़ा होगा।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने यह भी कहा कि यदि भारत के स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम में देरी होती है तो वायुसेना किसी अन्य लड़ाकू विमान प्लेटफॉर्म की खरीद पर विचार कर सकती है।
उन्होंने कहा कि रूस ने भारत को Su-57 लड़ाकू विमान की पेशकश की है, लेकिन इस संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
भारतीय वायुसेना में लड़ाकू स्क्वाड्रनों की घटती संख्या के बीच एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि अगले कुछ वर्षों में वायुसेना को हर साल कम से कम 36 से 40 नए लड़ाकू विमानों की जरूरत होगी। उन्होंने आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों के मद्देनजर वायुसेना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण है और देश को अपने यहां लड़ाकू विमान इंजन बनाने की क्षमता विकसित करनी होगी।
राफेल सौदे को भारत में लड़ाकू विमान निर्माण क्षमता बढ़ाने से भी जोड़ा जा रहा है। सितंबर में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा था कि अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद से भारत में लड़ाकू विमान उत्पादन की दूसरी लाइन स्थापित करने में मदद मिलेगी और रक्षा विनिर्माण में स्वदेशीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं, राफेल की खरीद के साथ स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (LCA) तेजस मार्क-1ए कार्यक्रम भी जारी रहेगा। एयर चीफ मार्शल सिंह के अनुसार, तेजस का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, जिसमें समय के साथ स्वदेशी रडार और हथियार प्रणालियों जैसी क्षमताओं को और बेहतर किया जाएगा।
भारतीय वायुसेना वर्तमान में राफेल सहित विभिन्न लड़ाकू विमान बेड़ों के आधुनिकीकरण पर काम कर रही है। हाल ही में सितंबर 2026 में भारत और जापान के बीच ‘वीर गार्जियन 2026’ हवाई अभ्यास में भी भारतीय वायुसेना ने राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और तेजस विमानों को शामिल किया था।