DRDO ने 21 किमी की ऊंचाई पर स्वदेशी हाई-एल्टीट्यूड एयरशिप का सफल परीक्षण कियाBy IANS Tue, 06 October 2026 05:27 PM

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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने मंगलवार को स्वदेशी रूप से विकसित हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम (HAPS) का सफल उड़ान परीक्षण किया। परीक्षण के दौरान प्लेटफॉर्म ने 21 किलोमीटर की ऊंचाई हासिल की और करीब 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर 30 मिनट से अधिक समय तक उड़ान भरकर लंबे समय तक स्ट्रैटोस्फियर में संचालन की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परीक्षण भारत की निगरानी, संचार और एयरोस्पेस क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत उन्नत स्वदेशी तकनीकों के विकास को बढ़ावा देता है।

मंत्रालय ने बताया कि प्रायोगिक उड़ान के दौरान प्लेटफॉर्म समुद्र तल से 21 किलोमीटर की अधिकतम ऊंचाई तक पहुंचा। इसके बाद यह लगभग 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर 30 मिनट से अधिक समय तक रहा, जिसके बाद इसे जमीन की ओर लौटने का निर्देश दिया गया। प्लेटफॉर्म को सुरक्षित रूप से बरामद कर लिया गया और उड़ान के दौरान एकत्र किए गए प्रदर्शन संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

इस परीक्षण की खासियत यह रही कि प्लेटफॉर्म ने स्ट्रैटोस्फियर में संचालन की क्षमता प्रदर्शित की। पृथ्वी की सतह से लगभग 10 से 50 किलोमीटर के बीच स्थित यह वायुमंडलीय क्षेत्र लंबे समय तक निगरानी, संचार और विभिन्न प्रकार के सेंसर आधारित मिशनों के लिए उपयोगी हो सकता है।

उड़ान के दौरान एयरबोर्न प्लेटफॉर्म से ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन तक रियल-टाइम वीडियो और वाहन के प्रदर्शन से संबंधित आंकड़े लगातार भेजे गए। इससे न केवल प्लेटफॉर्म की उड़ान क्षमता बल्कि उसके संचार और निगरानी संबंधी सिस्टम के प्रदर्शन का भी आकलन किया गया।

अधिकारियों के अनुसार, सिस्टम में इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट, GPS रिसीवर, ऑनबोर्ड कैमरे और ऊंचाई नियंत्रण तंत्र सहित विभिन्न उपकरण और नियंत्रण प्रणालियां लगाई गई थीं। परीक्षण के दौरान इन सभी प्रमुख सब-सिस्टम ने अपेक्षित तरीके से काम किया।

इस उड़ान परीक्षण में भारतीय वायुसेना के साथ सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दीनेस एंड सर्टिफिकेशन (CEMILAC), नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और अन्य संबंधित नागरिक एजेंसियों ने समन्वय किया।

हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म को DRDO की आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADRDE) द्वारा विकसित किया जा रहा है।

यह हल्की-से-हवा वाली प्रणाली (lighter-than-air system) लंबे समय तक हवा में बने रहने वाले एक प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य स्ट्रैटोस्फियर में लंबे समय तक संचालन के जरिए लगातार निगरानी और अन्य मिशनों के लिए एक वैकल्पिक क्षमता विकसित करना है।

ऐसे प्लेटफॉर्म भविष्य में सीमावर्ती क्षेत्रों की लगातार निगरानी, व्यापक क्षेत्र की निगरानी, संचार नेटवर्क को बढ़ाने और आपदा या आपातकालीन परिस्थितियों में अस्थायी संचार सहायता जैसे कार्यों में उपयोगी हो सकते हैं। पारंपरिक विमानों या उपग्रहों की तुलना में इनकी खासियत लंबे समय तक एक निश्चित क्षेत्र के ऊपर बने रहने की क्षमता हो सकती है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल उड़ान परीक्षण के लिए DRDO, भारतीय वायुसेना, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और उद्योग साझेदारों को बधाई दी।

उन्होंने इसे उन्नत एयरोस्पेस तकनीकों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह लंबे समय तक स्ट्रैटोस्फियर में संचालन करने वाले स्वदेशी एयरशिप के विकास की दिशा में अहम मील का पत्थर है।