प्लेटिनम का विकल्प बना भारतीय शोधकर्ताओं का नया कैटेलिस्ट, सस्ती हो सकती है स्वच्छ ऊर्जाBy IANS Thu, 08 October 2026 01:09 PM

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भारत के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा मेटल-फ्री और बेहद छिद्रयुक्त पदार्थ विकसित किया है, जो जिंक-एयर बैटरियों में महंगे प्लेटिनम कैटेलिस्ट का प्रभावी विकल्प बन सकता है। इस उपलब्धि से अगली पीढ़ी की स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों की लागत घटाने और उन्हें बड़े पैमाने पर अपनाने में मदद मिल सकती है।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, TTT-DHTD नाम का यह नया पदार्थ कार्बन, सल्फर, नाइट्रोजन और हाइड्रोजन जैसे आसानी से उपलब्ध तत्वों से तैयार किया गया है। इसकी संरचना मधुमक्खी के छत्ते जैसी अल्ट्रा-पोरस नेटवर्क वाली है, जो ऑक्सीजन को कुशलता से बिजली में बदलने में मदद करती है।

प्रयोगशाला परीक्षणों में TTT-DHTD ने व्यावसायिक प्लेटिनम कैटेलिस्ट के मुकाबले करीब 96 प्रतिशत प्रदर्शन हासिल किया। खास बात यह रही कि यह लंबे समय तक स्थिर भी बना रहा। मंत्रालय के मुताबिक, 120 घंटे तक लगातार इस्तेमाल के बाद भी इसके प्रदर्शन में उल्लेखनीय गिरावट नहीं आई और न ही इसमें वह खराबी या दूषण देखने को मिला, जो कई पारंपरिक धातु-आधारित कैटेलिस्ट में समस्या पैदा करता है।

जिंक-एयर बैटरियों को भविष्य की ऊर्जा भंडारण तकनीकों में महत्वपूर्ण माना जाता है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल की तुलना में इनमें उच्च दबाव वाले हाइड्रोजन भंडारण या बड़े पैमाने के हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होती। इससे इन्हें अपेक्षाकृत सरल और कॉम्पैक्ट ऊर्जा भंडारण विकल्प के रूप में देखा जाता है।

हालांकि, जिंक-एयर बैटरियों और हाइड्रोजन फ्यूल सेल दोनों के लिए ऑक्सीजन की इलेक्ट्रोकेमिस्ट्री बेहद महत्वपूर्ण है। ऑक्सीजन रिडक्शन रिएक्शन (ORR) को प्रभावी ढंग से कराने के लिए मौजूदा स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों, खासकर हाइड्रोजन फ्यूल सेल, में प्लेटिनम का व्यापक इस्तेमाल होता है।

प्लेटिनम उत्कृष्ट कैटेलिटिक प्रदर्शन देता है, लेकिन इसकी दुर्लभता, ऊंची कीमत और सीमित उपलब्धता बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के विस्तार में बड़ी चुनौती है। ऐसे में प्लेटिनम-मुक्त ORR कैटेलिस्ट विकसित करना वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य बन गया है।

भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा विकसित TTT-DHTD की आणविक संरचना को इस तरह तैयार किया गया है कि इसमें ऑक्सीजन अणुओं के जुड़ने और प्रतिक्रिया करने के लिए उपयुक्त सक्रिय स्थल बन सकें। इससे बिजली उत्पादन की प्रक्रिया तेज और प्रभावी तरीके से हो सकती है।

शोधकर्ताओं की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि महंगे प्लेटिनम की जगह कम लागत वाले कार्बन-आधारित ऑर्गेनिक पदार्थों का इस्तेमाल जिंक-एयर बैटरियों की कीमत को काफी कम कर सकता है। इससे स्वच्छ परिवहन, पोर्टेबल पावर सिस्टम और नवीकरणीय ऊर्जा के भंडारण जैसी तकनीकों को अधिक किफायती बनाने में मदद मिल सकती है।

मंत्रालय ने कहा कि शोध में नवीन आणविक डिजाइन को उन्नत कंप्यूटेशनल अध्ययन के साथ जोड़ा गया है। इसके जरिए यह प्रदर्शित किया गया है कि पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध तत्व भी स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के लिए महत्वपूर्ण रासायनिक प्रतिक्रियाओं में कीमती धातुओं जैसा प्रदर्शन कर सकते हैं।