भारी सामान ढोने वाले YETI ड्रोन के विकास के लिए आइडियाफोर्ज को मिलेंगे 151 करोड़ रुपयेBy IANS Wed, 14 October 2026 06:16 PM

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देश में स्वदेशी ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने ड्रोन निर्माता कंपनी आइडियाफोर्ज को YETI नामक भारी सामान ढोने वाले लंबी दूरी के स्वायत्त ड्रोन के विकास के लिए 151 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने का समझौता किया है। बुधवार को जारी आधिकारिक बयान में इसकी जानकारी दी गई।

यह राशि अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (आरडीआई) के तहत ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। इस परियोजना की कुल लागत 302 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य YETI तकनीक को प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर (टीआरएल) 4 से बढ़ाकर टीआरएल 9 तक पहुंचाना है। टीआरएल 9 तकनीक के उस चरण को दर्शाता है, जहां किसी प्रणाली का वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में सफल प्रदर्शन किया जा चुका होता है।

YETI को ऐसे इलाकों में माल और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए विकसित किया जा रहा है, जहां पारंपरिक परिवहन व्यवस्था से आपूर्ति करना कठिन, समय लेने वाला या परिचालन की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होता है। इसमें ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्र, रेगिस्तान और समुद्री इलाके शामिल हैं।

कंपनी के अनुसार, यह ड्रोन एक स्वायत्त हाइब्रिड मानवरहित हवाई वाहन होगा, जिसमें वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (VTOL) और फिक्स्ड-विंग तकनीक का संयोजन होगा। यानी यह हेलीकॉप्टर की तरह सीधे ऊपर उड़ान भरने और नीचे उतरने में सक्षम होगा, जबकि फिक्स्ड-विंग डिजाइन की मदद से लंबी दूरी तक उड़ान भर सकेगा।

200 किलो तक सामान ले जाने की क्षमता

YETI को अधिकतम 200 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। इसकी लक्षित उड़ान सीमा 200 किलोमीटर तक और परिचालन ऊंचाई समुद्र तल से 6,500 मीटर तक होगी। इस क्षमता के चलते यह दूरदराज के इलाकों में रसद और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बयान के मुताबिक, ड्रोन का डिजाइन प्रतिकूल मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में परिचालन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका इस्तेमाल ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों, रेगिस्तानी इलाकों और समुद्री परिस्थितियों में किया जा सकेगा।

इसकी एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसे लगभग 15 मीटर × 15 मीटर के छोटे और बिना विशेष तैयारी वाले स्थान से भी उड़ाया तथा उतारा जा सकेगा। इससे उन क्षेत्रों में भी इसका इस्तेमाल संभव हो सकता है, जहां रनवे या अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

दुर्गम क्षेत्रों में रसद पहुंचाने पर जोर

YETI परियोजना का उद्देश्य लंबी दूरी तक भारी सामान की स्वायत्त ढुलाई करने में सक्षम हवाई प्रणाली विकसित करना है। इसकी वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग क्षमता के कारण उन स्थानों तक पहुंचना आसान हो सकता है, जहां सड़क संपर्क सीमित है या पारंपरिक परिवहन में अधिक समय लगता है।

परियोजना के लिए दी जा रही वित्तीय सहायता से ड्रोन की तकनीक को उन्नत करने और उसे वास्तविक परिचालन के लिए तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसकी लक्षित क्षमता और परिचालन विशेषताएं विकास परियोजना का हिस्सा हैं; वास्तविक उपयोग में इनका प्रदर्शन आगे के परीक्षणों और तकनीकी सत्यापन पर निर्भर करेगा।