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भारत एक मौजूदा प्राकृतिक गैस आधारित अमोनिया और यूरिया संयंत्र को नवीकरणीय ऊर्जा पर चलाने के लिए तैयार है, जिससे दुनिया के सबसे बड़े ग्रीन-अमोनिया संयंत्रों में से एक बनेगा। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इस संयंत्र का सालाना उत्पादन लक्ष्य करीब 11 लाख टन है।
सिंगापुर स्थित एशियन पावर (एपी) की रिपोर्ट के अनुसार, यह परियोजना एएम ग्रीन अमोनिया (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित की जाएगी और इसे एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और जापान के वित्तपोषण का समर्थन प्राप्त है।
यह एक्शन फॉर क्रिएटिंग एनर्जी सिक्योरिटी फॉर लॉन्ग-टर्म रेजिलिएंस (एसीसीईएल) के तहत उनका पहला संयुक्त निवेश है। एसीसीईएल को एडीबी और जापान सरकार ने मई 2026 में एक संयुक्त पहल के रूप में शुरू किया था, जो एशिया-प्रशांत देशों और कारोबारों को ऊंची ऊर्जा लागत, ईंधन की अस्थिरता और आपूर्ति की सीमाओं से निपटने में मदद करता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तपोषण में लीडिंग एशिया'ज प्राइवेट इंफ्रास्ट्रक्चर फंड 2 से 100 मिलियन डॉलर का ऋण शामिल है, जिसे जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी द्वारा वित्तपोषित और एडीबी द्वारा प्रशासित किया जाता है।
एडीबी अध्यक्ष मासातो कांडा के हवाले से प्रकाशन ने कहा, "जीवाश्म ईंधन के बजाय नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके भारत इसे बहुत कम उत्सर्जन के साथ और ऐसे पैमाने पर उत्पादित कर सकता है जो इस उद्योग को नया आकार देने में मदद कर सके।"
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस पहल के दो हिस्से हैं: अल्पकालिक स्तर पर कॉर्पोरेट तरलता के लिए सहायता, विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए, और दीर्घकालिक स्तर पर अधिक विविध और टिकाऊ ऊर्जा प्रणालियों के लिए समर्थन।
एडीबी के एक बयान के अनुसार, एसीसीईएल वित्तीय सहायता और निवेश को एक साथ लाकर देशों को तत्काल झटकों को संभालने और भविष्य के लिए मजबूत ऊर्जा प्रणालियों का निर्माण करने में मदद करता है।
भारत ने जुलाई 2026 तक 300 गीगावाट से अधिक स्थापित गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता हासिल कर ली है, जिसमें वित्त वर्ष 2026 के दौरान करीब 55.29 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता शामिल है। देश ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता का लक्ष्य भी तय किया है, जिसमें सौर और पवन ऊर्जा की बड़ी भूमिका होगी।
यह परियोजना भारत की ऊर्जा यात्रा में एक अहम पड़ाव है, क्योंकि यह उर्वरक क्षेत्र — जो पारंपरिक रूप से प्राकृतिक गैस पर निर्भर रहा है — को नवीकरणीय ऊर्जा की ओर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ग्रीन अमोनिया न केवल उर्वरकों के लिए कच्चा माल बन सकता है, बल्कि भविष्य में हरित हाइड्रोजन के वाहक के रूप में भी काम कर सकता है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और निर्यात संभावनाएं दोनों मजबूत हो सकती हैं।