
वॉशिंगटन- अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से समुद्र में किसी भी तरह के उकसावे वाले कदमों से बचने की अपील की है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में रविवार से दो दिवसीय लाइव-फायर नौसैनिक अभ्यास की घोषणा की है।
सेंटकॉम ने एक बयान में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग और वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम कॉरिडोर है। आम तौर पर हर दिन करीब 100 वाणिज्यिक जहाज इस संकरे जलमार्ग से गुजरते हैं। सेंटकॉम ने आईआरजीसी से आग्रह किया कि वह अभ्यास को “सुरक्षित, पेशेवर तरीके से और नौवहन की स्वतंत्रता के लिए अनावश्यक जोखिम से बचते हुए” अंजाम दे।
अमेरिकी कमांड ने चेतावनी दी कि अमेरिकी बलों, क्षेत्रीय साझेदारों या वाणिज्यिक जहाजों के पास किसी भी तरह का असुरक्षित या गैर-पेशेवर व्यवहार टकराव, तनाव और अस्थिरता के खतरे को बढ़ाता है। इसमें अमेरिकी सैन्य जहाजों की ओर टकराव की दिशा में तेज गति से नौकाएं लाना, कम ऊंचाई पर या हथियारों से लैस उड़ानें भरना, या अमेरिकी बलों पर हथियार तानना जैसे कदम शामिल हैं, जिन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान की ओर एक बड़ा नौसैनिक बेड़ा भेज रहा है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन किसी समझौते की उम्मीद करता है, लेकिन अगर कूटनीति विफल रहती है तो अन्य विकल्पों के लिए भी तैयार है।
ट्रंप ने कहा कि यह तैनाती वेनेजुएला के तट के पास मौजूद अमेरिकी नौसैनिक बलों से भी बड़ी होगी। उन्होंने इसे “एक बड़ा आर्माडा, फ्लोटिला” बताया और कहा कि इसका उद्देश्य बातचीत के दौरान दबाव बनाना है।
उन्होंने कहा, “हम अब वास्तव में ईरान की ओर ज्यादा जहाज भेज रहे हैं। उम्मीद है कि हम कोई समझौता कर पाएंगे।”
यह पूछे जाने पर कि क्या ईरान को कोई समयसीमा दी गई है, ट्रंप ने इसका खुलासा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ उन्हें ही पता है।” ट्रंप ने यह भी पुष्टि की कि उन्होंने ईरान से सीधे संवाद किया है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका बातचीत से समाधान चाहता है, लेकिन तनाव बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया। “अगर समझौता हो जाता है तो यह अच्छी बात है। अगर नहीं होता, तो फिर देखा जाएगा,” ट्रंप ने कहा।
सेंटकॉम ने स्पष्ट किया कि वह मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी कर्मियों, जहाजों और विमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और अमेरिकी बल अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करते हुए उच्च स्तर की पेशेवर क्षमता के साथ काम करते रहेंगे।
गौरतलब है कि प्रतिबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों को लेकर अमेरिका और ईरान के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं, और ऐसे हालात में नौसैनिक तैनाती अक्सर दबाव और संकेत के तौर पर इस्तेमाल की जाती रही है।
With inputs from IANS