ट्रंप का दावा— संयुक्त राष्ट्र के वित्तीय संकट को ‘बहुत आसानी से’ सुलझा सकते हैं, जबकि अमेरिका के 4 अरब डॉलर के बकाये से गहराया संकटBy Admin Mon, 02 February 2026 06:42 AM

संयुक्त राष्ट्र। अमेरिका द्वारा संयुक्त राष्ट्र (यूएन) को करीब 4 अरब डॉलर के बकाये का भुगतान रोके जाने से विश्व संगठन गंभीर वित्तीय संकट के कगार पर पहुंच गया है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि वह इस समस्या को “बहुत आसानी से” हल कर सकते हैं, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका अपने बकाये का भुगतान करेगा या नहीं।

रविवार (स्थानीय समय) को पॉलिटिको को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि यदि यह मुद्दा उनके सामने लाया जाए तो वह इसे तुरंत सुलझा सकते हैं, लेकिन उन्होंने यह नहीं कहा कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र को अपनी बकाया राशि जारी करेगा। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यही अमेरिकी बकाया मौजूदा वित्तीय संकट की जड़ में है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने सदस्य देशों के मिशन प्रमुखों को लिखे एक पत्र में चेतावनी दी है कि विश्व संगठन “तत्काल वित्तीय पतन” के खतरे का सामना कर रहा है, हालांकि पत्र में अमेरिका का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया।

एक संयुक्त राष्ट्र अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका पर नियमित बजट के तहत 2.196 अरब डॉलर और शांति स्थापना (पीसकीपिंग) बजट के तहत 1.8 अरब डॉलर बकाया हैं। वर्ष 2026 के लिए 768 मिलियन डॉलर के आकलन को छोड़ दें, जिसे चुकाने की समयसीमा अभी बाकी है, तो अमेरिका का पुराना बकाया करीब 1.429 अरब डॉलर है।

संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट में अमेरिका का योगदान सबसे अधिक है—करीब 22 प्रतिशत—जो महासभा द्वारा तय किए गए जटिल फार्मूले पर आधारित है। ऐसे में अमेरिका का बकाया संगठन की वित्तीय स्थिति पर disproportionately बड़ा असर डालता है।

हालांकि ट्रंप पहले संयुक्त राष्ट्र की तीखी आलोचना कर चुके हैं और इससे जुड़ी कई एजेंसियों से अमेरिका को बाहर भी कर चुके हैं, लेकिन पॉलिटिको साक्षात्कार में उन्होंने अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाते हुए संयुक्त राष्ट्र को अपनी संभावित विरासत के रूप में भी पेश किया। उन्होंने कहा, “जब मैं युद्ध सुलझाने के लिए नहीं रहूंगा, तब संयुक्त राष्ट्र यह कर सकता है। इसमें अपार संभावनाएं हैं।”

ट्रंप ने यह भी दोहराया कि संयुक्त राष्ट्र न्यूयॉर्क या अमेरिका छोड़कर कहीं नहीं जा रहा है। उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र अमेरिका नहीं छोड़ेगा, क्योंकि इसमें बहुत बड़ी क्षमता है।”

खर्च घटाने के उपायों के तहत संयुक्त राष्ट्र पहले ही कुछ गतिविधियों को कम खर्च वाले देशों में स्थानांतरित कर चुका है और अन्य को भी शिफ्ट करने पर विचार कर रहा है।

ट्रंप ने दावा किया कि वह कुछ ही मिनटों में देशों से उनका बकाया वसूल करवा सकते हैं, जैसा उन्होंने नाटो के मामले में किया था। उन्होंने कहा, “मुझे बस इन देशों को फोन करना होगा… वे मिनटों में चेक भेज देंगे।” हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि अमेरिका के अपने बकाये का क्या होगा।

ध्यान देने वाली बात यह है कि चीन सहित अन्य बड़े योगदानकर्ता देश, जो बजट का 18 प्रतिशत देते हैं, 2025 या उससे पहले के वर्षों के लिए बकायेदार नहीं हैं। कुछ छोटे देश जैसे मैक्सिको और वेनेजुएला जरूर बकायेदार हैं, लेकिन उनसे भुगतान करवाने से संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय स्थिति में खास सुधार नहीं होगा।

महासचिव गुटेरेस ने अपने पत्र में कहा, “या तो सभी सदस्य देश समय पर और पूरी राशि का भुगतान करें, या फिर वित्तीय नियमों में मूलभूत बदलाव किए जाएं, ताकि आसन्न वित्तीय पतन को रोका जा सके।”

संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो जुलाई तक संगठन के पास धन समाप्त हो सकता है और सितंबर में होने वाली उच्चस्तरीय महासभा बैठक भी खतरे में पड़ सकती है। यहां तक कि न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र का प्रतिष्ठित मुख्यालय अस्थायी रूप से बंद होने की नौबत भी आ सकती है।

सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—क्या ट्रंप अमेरिका के 4 अरब डॉलर के बकाये का भुगतान करेंगे?

 

With inputs from IANS