
वॉशिंगटन। मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य बलों की तेज तैनाती ऐसे स्तर पर पहुंच गई है कि राष्ट्रपति Donald Trump के पास इस सप्ताहांत तक ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू करने का विकल्प मौजूद है। यह दावा द न्यूयॉर्क टाइम्स ने प्रशासन और पेंटागन अधिकारियों के हवाले से किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा सैन्य स्थिति ट्रंप को ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों और लॉन्च साइट्स पर हमला करने की क्षमता देती है। हालांकि, राष्ट्रपति ने अभी तक आगे की कार्रवाई को लेकर कोई अंतिम संकेत नहीं दिया है।
यह सैन्य जमावड़ा उस समय भी जारी रहा जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच मंगलवार को जिनेवा में अप्रत्यक्ष वार्ता हुई। ईरान के विदेश मंत्री ने “मार्गदर्शक सिद्धांतों के एक सेट” पर सहमति बनने की बात कही, जबकि अमेरिकी अधिकारियों ने प्रगति स्वीकार की, लेकिन महत्वपूर्ण मतभेद बने रहने की बात भी मानी।
ट्रंप बार-बार मांग करते रहे हैं कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ दे, जिसमें यूरेनियम संवर्धन रोकने की शर्त भी शामिल है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ईरान उनकी शर्तें नहीं मानता, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने कहा कि राष्ट्रपति अब भी कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति हमेशा स्पष्ट रहे हैं कि ईरान या किसी भी देश के मामले में कूटनीति उनका पहला विकल्प है। ईरान के लिए समझदारी इसी में है कि वह राष्ट्रपति ट्रंप और इस प्रशासन के साथ समझौता करे।”
रिपोर्ट के मुताबिक, इस सैन्य तैनाती में 50 से अधिक अतिरिक्त लड़ाकू विमान, दर्जनों ईंधन आपूर्ति टैंकर और दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप शामिल हैं। यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड जिब्राल्टर के पास पहुंच चुका है और क्षेत्र में पहले से मौजूद यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ जुड़ने वाला है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, तैनाती में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली और टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम भी शामिल हैं, जो ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए डिजाइन किए गए हैं।
अतिरिक्त F-35, F-22 और F-16 लड़ाकू विमान अमेरिका से यूरोप होते हुए मध्य पूर्व भेजे गए हैं। दीर्घकालिक हवाई अभियानों के लिए आवश्यक ईंधन आपूर्ति विमान भी तैनात किए गए हैं।
एक सैन्य अधिकारी ने अखबार को बताया कि अमेरिका अब कम-से-कम एक अल्पकालिक अभियान के दौरान अपने सैनिकों, सहयोगियों और परिसंपत्तियों को ईरानी जवाबी कार्रवाई से बचाने में सक्षम है। हालांकि, लंबी और व्यापक जंग की स्थिति में सैन्य तैयारी कितनी पर्याप्त होगी, यह स्पष्ट नहीं है।
इजरायली बल भी संभावित संयुक्त कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। इजरायली रक्षा अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि योजना के तहत कुछ दिनों में कड़ा प्रहार कर ईरान को वार्ता मेज पर रियायतें देने के लिए मजबूर करने की रणनीति पर विचार हो रहा है।
पिछले वर्ष जून में 12 दिन के संघर्ष के दौरान ट्रंप ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमला किया था और उस समय दावा किया था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम “पूरी तरह नष्ट” कर दिया गया है। अब वह दोबारा सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों ने राष्ट्रपति को आगाह किया है कि ईरानी नेतृत्व में बदलाव के उद्देश्य से कोई भी अभियान सफल होने की गारंटी नहीं देता।
With inputs from IANS