श्रीलंका ईस्टर बम धमाकों की नई जांच से NTJ का दक्षिण भारत में कट्टरपंथी नेटवर्क फिर जांच के घेरे मेंBy Admin Fri, 27 February 2026 03:16 PM

नई दिल्ली: श्रीलंका के पूर्व खुफिया प्रमुख Suresh Sallay की गिरफ्तारी 2019 के ईस्टर संडे बम धमाकों की नई जांच में एक अहम मोड़ मानी जा रही है। इन हमलों में 279 लोगों की जान गई थी।

यह कदम 2024 में राष्ट्रपति बने Anura Kumara Dissanayake द्वारा उठाया गया, जिन्होंने सत्ता में आने से पहले हमलों से जुड़े सभी लोगों को न्याय के कटघरे में लाने का वादा किया था। साल 2019 में Gotabaya Rajapaksa के राष्ट्रपति बनने के बाद सल्ले को स्टेट इंटेलिजेंस सर्विस (SIS) का प्रमुख बनाया गया था।

आरोप है कि सल्ले ने 2019 के राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से इन हमलों को होने देने की अनुमति दी, जिसमें अंततः राजपक्षे की जीत हुई। कभी श्रीलंका में एक प्रभावशाली सुरक्षा अधिकारी माने जाने वाले और Liberation Tigers of Tamil Eelam (LTTE) के खात्मे में भूमिका निभाने का श्रेय पाने वाले सल्ले की गिरफ्तारी से देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और LTTE से जुड़े पुराने विवाद फिर उभरने की आशंका जताई जा रही है।

श्रीलंका के पूर्व विदेश मंत्री Ali Sabry ने इन घटनाक्रमों को गंभीर चिंता का विषय बताया है। वहीं, भारतीय अधिकारियों ने कहा कि नई दिल्ली श्रीलंका की स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है। एक अधिकारी के अनुसार, LTTE को फिर से उभारने की कोशिशें हो सकती हैं, लेकिन भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत सहयोग के चलते यह बेहद मुश्किल होगा।

भारत की National Investigation Agency (एनआईए) पहले भी LTTE से जुड़ी पुनरुत्थान की कोशिशों से संबंधित कई मामलों की जांच कर चुकी है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि पाकिस्तान की Inter-Services Intelligence ने भी ऐसे प्रयास किए, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली।

भारत और श्रीलंका के रिश्ते अब विचारधारा से आगे बढ़कर निवेश-आधारित साझेदारी की ओर बढ़ चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक प्रधानमंत्री Narendra Modi और राष्ट्रपति दिसानायके के बीच व्यावहारिक संबंधों ने सुरक्षा सहित हर क्षेत्र में सहयोग को मजबूत किया है।

खुफिया एजेंसियों की सबसे बड़ी चिंता इस समय National Thowheeth Jama’ath (NTJ) और Jamathei Millathu Ibrahim (JMI) की गतिविधियां हैं, जो ईस्टर धमाकों के लिए जिम्मेदार थे। अधिकारियों के अनुसार, NTJ ने विशेष रूप से दक्षिण भारत में अपनी पैठ बना ली है और तमिलनाडु व केरल में बड़ी संख्या में युवाओं को कट्टरपंथी बनाया है।

हमलों का मास्टरमाइंड Mohammad Zahran Hashim तमिलनाडु का अक्सर दौरा करता था और उसने 2022 में कोयंबटूर में मंदिर पर हमले की नाकाम कोशिश करने वाले जेमेशा मुबीन के कट्टरपंथीकरण में भी भूमिका निभाई थी। एनआईए की जांच में सामने आया कि दक्षिण भारत में कट्टरपंथीकरण की पूरी साजिश श्रीलंका से हाशिम द्वारा संचालित की जा रही थी। जब्त किए गए करीब आधे वीडियो हाशिम के भाषणों के थे, जिसके Islamic State से करीबी संबंध पाए गए।

अधिकारियों का मानना है कि सल्ले से पूछताछ के दौरान हाशिम द्वारा चलाए गए नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारियां मिल सकती हैं, जो दक्षिण भारत में NTJ से जुड़े मामलों की जांच में भारतीय एजेंसियों के लिए उपयोगी होंगी। एनआईए के अनुसार, भारत में रहते हुए हाशिम ने मलप्पुरम, कोयंबटूर, नागपट्टिनम, कन्याकुमारी, रामनाथपुरम, वेल्लोर, तिरुचिरापल्ली और तिरुनेलवेली जैसे क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां केंद्रित की थीं।

फिलहाल सल्ले ने ईस्टर धमाकों से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है। भारतीय अधिकारियों ने इस पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि मामले की हर पहलू से गहन जांच जरूरी है, क्योंकि NTJ की गतिविधियों का सीधा असर भारत, खासकर दक्षिणी राज्यों की सुरक्षा पर पड़ता है।

 

With inputs from IANS