इस्लामिक NATO से अलगाव तक: आसिम मुनिर की रणनीतिक विफलताएं बढ़ा रही पाकिस्तान की चुनौतीBy Admin Tue, 07 April 2026 04:17 PM

नई दिल्ली – पाकिस्तान ने पश्चिम एशिया में खुद को सुरक्षा प्रदाता के रूप में पेश करने की कोशिश की और यहाँ तक कि एक इस्लामिक NATO बनाने की संभावना भी तलाशी। न्यूक्लियर शक्ति होने के नाते, पाकिस्तान ने सोचा कि वह इस गठबंधन का नेतृत्व कर सकता है और इससे पश्चिम एशिया में उसकी भूमिका मजबूत होगी।

### रणनीतिक महत्वाकांक्षाएं और असफलताएं

पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता किया और तुर्की ने भी इसी तरह का समझौता करने का प्रयास किया। पाकिस्तान ने उम्मीद की थी कि मिस्र और सोमालिया को भी इस गठबंधन में शामिल किया जा सकता है। लेकिन जैसे ही अमेरिका-इज़राइल-ईरान संघर्ष शुरू हुआ, पाकिस्तान की रणनीति ध्वस्त हो गई।

ईरान ने कई खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, और सऊदी अरब ने उम्मीद की कि पाकिस्तान अपने रक्षा समझौते के अनुसार उसका समर्थन करेगा। लेकिन पाकिस्तान ने ऐसा नहीं किया, क्योंकि 15% शिया आबादी को नाराज़ करना संभव नहीं था। वहीं, अमेरिका और इज़राइल का समर्थन करना सुन्नियों को नाराज़ कर सकता था, जो इस युद्ध को मुस्लिम बनाम क्रिश्चियन-यहूदी संघर्ष के रूप में देख रहे हैं।

पाकिस्तान की इस अवसरवादी नीति ने उसकी वैश्विक विश्वसनीयता को कमजोर कर दिया। इस अवसरवादी रवैये और संकट के समय प्रतिबद्धता की कमी ने इस्लामिक NATO बनाने के सपने को ध्वस्त कर दिया और इस तरह पाकिस्तान की पश्चिम एशियाई महत्वाकांक्षाएं भी टूट गईं।

### आसिम मुनिर की भूमिका और आंतरिक चुनौतियां

पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनिर ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की, लेकिन ईरान ने इसे अस्वीकार कर दिया। जनवरी 2025 में ईरान ने बलूचिस्तान में जैश-ए-अदल के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले भी किए थे, जिससे दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी और बढ़ गई।

विशेषज्ञों के अनुसार, मुनिर ने अफगानिस्तान पर दबाव बढ़ाने का निर्णय लिया है। वह राजनीतिक नेतृत्व के साथ सलाह-मशविरा किए बिना निर्णय ले रहे हैं और अब यह सिर्फ पाकिस्तान का चेहरा बचाने का मामला नहीं, बल्कि खुद मुनिर को बेहतर दिखाने का प्रयास बन गया है।

### सीमा पर सतर्कता आवश्यक

इंटेलिजेंस ब्यूरो के अनुसार, मुनिर अफगानिस्तान में तनाव बढ़ा सकते हैं और बलूचिस्तान व खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा बलों के माध्यम से कठोर कार्रवाई कर सकते हैं। इससे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को भी उच्च सतर्कता बरतनी होगी।

पाकिस्तान की आंतरिक और बाहरी असफल नीतियों के कारण, फील्ड मार्शल आसिम मुनिर की स्थिति नाजुक और जोखिमपूर्ण बनती जा रही है, जिससे किसी बड़ी ग़लत चाल की संभावना बढ़ रही है।
 

 

With inputs from IANS