
सऊदी अरब सरकार ने इस वर्ष हज यात्रा के दौरान मर्यादा बनाए रखने के लिए मक्का की मस्जिद अल-हरम और मदीना की मस्जिद-ए-नबी के भीतर फोटो खींचने और वीडियो बनाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। प्रशासन का मानना है कि पवित्र स्थलों पर सेल्फी और रील बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति से इबादत में खलल पड़ता है और भीड़ प्रबंधन में समस्या आती है। अब हाजियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे इन परिसरों के भीतर मोबाइल का इस्तेमाल केवल जरूरी संचार के लिए ही करें।
रील बनाने पर 2.5 लाख रुपये तक का जुर्माना
नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए सऊदी हुकूमत ने भारी आर्थिक दंड का प्रावधान किया है। यदि कोई हाजी प्रतिबंधित क्षेत्रों में फोटो या वीडियो लेते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर 10,000 रियाल का जुर्माना लगाया जाएगा। भारतीय मुद्रा में यह राशि लगभग 2,47,100 रुपये होती है। हज ट्रेनरों ने देशभर के आजमीन को आगाह किया है कि वे सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाने के चक्कर में न पड़ें, अन्यथा उन्हें भारी आर्थिक नुकसान के साथ कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
होटल में खाना बनाने पर पहली बार पाबंदी
इस बार की हज यात्रा में एक और बड़ा बदलाव किया गया है। अब तक भारतीय हाजी अपनी सुविधा और स्वाद के अनुसार होटल के कमरों में खुद खाना बना लिया करते थे, लेकिन अब इस पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सुरक्षा कारणों और स्वच्छता मानकों को देखते हुए सऊदी सरकार ने होटलों में खाना बनाने को प्रतिबंधित कर दिया है। अब सभी यात्रियों को होटल प्रबंधन द्वारा उपलब्ध कराया गया भोजन ही करना होगा। हाजियों को सलाह दी गई है कि वे अपने साथ चूल्हा या खाना पकाने का कोई भी सामान साथ न ले जाएं।
बिना वैध वीजा पकड़े जाने पर सख्त सजा
हज यात्रा के दौरान घुसपैठ रोकने और भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए वीजा नियमों को और सख्त कर दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति मक्का या मदीना की सीमा के भीतर बिना वैध हज वीजा के पाया जाता है, तो उस पर 30,000 रियाल का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही, उन होटल मालिकों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी जो बिना वीजा वाले यात्रियों को पनाह देंगे। ऐसे होटल मालिकों पर 1 लाख रियाल तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है, जिससे अवैध रूप से रुकने वालों पर नकेल कसी जा सके।
रवानगी और वापसी का पूरा शेड्यूल
उत्तर प्रदेश सहित देशभर से हाजियों की रवानगी का सिलसिला 16 अप्रैल से शुरू हो चुका है। अकेले मुरादाबाद जिले से इस वर्ष करीब 2,090 जायरीन मुकद्दस सफर पर जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, सभी हज यात्रियों को 20 मई तक सऊदी अरब पहुंचा दिया जाएगा। हज की रस्में पूरी होने के बाद वतन वापसी का दौर 2 जून से शुरू होगा और आखिरी फ्लाइट 28 जून को भारत आएगी। रवानगी को लेकर सभी हवाई अड्डों पर विशेष इंतजाम किए गए हैं।
यात्रियों को विशेष ट्रेनिंग और सावधानी की सलाह
हज यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए विभिन्न जिलों में हज ट्रेनरों द्वारा विशेष ट्रेनिंग कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में हाजियों को सऊदी अरब के नए कानूनों, दंड के प्रावधानों और स्थानीय संस्कृति के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपना पूरा ध्यान केवल इबादत पर लगाएं और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें ताकि उनकी यात्रा बिना किसी व्यवधान के सफल हो सके।