होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर ईरान से परमाणु वार्ता को तैयार अमेरिका: मार्को रुबियोBy Admin Mon, 25 May 2026 03:45 PM

वॉशिंगटन। Marco Rubio ने कहा है कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलता है, तो अमेरिका उसके परमाणु कार्यक्रम पर “गंभीर बातचीत” के लिए तैयार है।

रिपोर्ट के अनुसार, रुबियो के बयान से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन चरणबद्ध तरीके से समझौते की दिशा में आगे बढ़ सकता है। इसके तहत शुरुआती अंतरिम समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े सभी मुद्दों का तुरंत समाधान जरूरी नहीं होगा।

The New York Times की रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली यात्रा के दौरान रुबियो ने कहा, “72 घंटे में किसी कागज पर बैठकर परमाणु समझौता तैयार नहीं किया जा सकता।”

उन्होंने कहा, “सबसे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल खोला जाना चाहिए। इसके बाद तय मानकों के तहत यूरेनियम संवर्धन, उच्च स्तर के संवर्धित यूरेनियम और ईरान की इस प्रतिबद्धता पर गंभीर बातचीत होगी कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।”

रुबियो ने माना कि तकनीकी मुद्दों को सुलझाने में समय लगेगा, लेकिन यह प्रक्रिया वर्षों तक नहीं चल सकती।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर अगले दो महीनों में बातचीत से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई की धमकी दे सकता है।

रुबियो ने कहा, “आखिरकार इस रणनीति से वही परिणाम निकलने चाहिए, जिसकी हमें उम्मीद है। अगर ऐसा नहीं होता, तो 60 दिनों बाद राष्ट्रपति के पास वही सभी विकल्प मौजूद होंगे, जो आज हैं।”

हालांकि, अमेरिका और ईरान दोनों ने अब तक संभावित बातचीत या समझौते के विवरण सार्वजनिक नहीं किए हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि चरणबद्ध समझौता अमेरिका के लिए आगे की वार्ताओं में दबाव बनाने की क्षमता को कमजोर कर सकता है।

रुबियो ने एक बार फिर Donald Trump के उस रुख को दोहराया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

उन्होंने कहा, “ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं रख सकता। राष्ट्रपति ट्रंप इस पर पूरी तरह स्पष्ट हैं और जब तक वह अमेरिका के राष्ट्रपति हैं, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा।”

रुबियो ने यह भी बताया कि अमेरिका और खाड़ी क्षेत्र के उसके सहयोगी देश ऐसे प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला रहे और वहां किसी तरह का टोल न लगाया जाए। हालांकि, इसके लिए ईरान की पूरी सहमति और पालन जरूरी होगा।

 

With inputs from IANS